वाराणसी में 28 जनवरी को शिकायतकर्ता के साथ एन्टी करप्शन वाराणसी की टीम इंस्पेक्टर सत्यवीर सिंह के नेतृत्व में चौकी विद्यापीठ पहुंची। प्रहलाद चौकी प्रभारी शिवाकर मिश्रा से मिले। दरोगा ने पैसे मांगे तो प्रहलाद ने 20 हजार रुपए जेब से निकालकर देने लगे।
वाराणसी में बुधवार को रिश्वतखोरी में पकड़े गए दरोगा और सिपाही को वीआईपी ट्रीटमेंट देने का मामला सामने आया है। गुरुवार को उन्हें लग्जरी कार से पेशी पर लाया गया। कार को बाकायदा कमिश्नर कार्यालय का मेन गेट खोलकर एंट्री दी गई। दरोगा और सिपाही कार से उतरे और उन्हें अंदर ले जाया गया, यह खबर तेजी से वायरल हुई और अब इसकी विभाग में काफी चर्चा हो रही है।
बता दें कि एक केस से नाम निकालने के लिए 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगने और 20 हजार रुपए लेने वाले दरोगा शिवाकर मिश्रा को डीसीपी ने सस्पेंड कर दिया है। काशी विद्यापीठ चौकी इंचार्ज शिवाकर मिश्रा के साथ उसका कारखास सिपाही गौरव कुमार द्विवेदी भी निलंबित कर दिया गया है।
डीसीपी काशी गौरव बंसवाल ने आरोपी दरोगा और सिपाही के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी है। पुलिस कमिश्नर ने दरोगा की फाइल और गोपनीय रिपोर्ट भी तलब की है। पुलिस कमिश्नर की नियमावली के चलते दरोगा शिवाकर मिश्रा को अगले एक साल तक चार्ज मिलना भी मुश्किल होगा। वहीं पुलिस महकमे के कई इंस्पेक्टर और दरोगा आरोपी रिश्वतखोर शिवाकर मिश्रा को बचाने की जुगत में भिड़ गए हैं।
एंटी करप्शन टीम आरोपी दरोगा शिवाकर मिश्रा और उसके कारखास सिपाही गौरव कुमार द्विवेदी को एंटी करप्शन कोर्ट नंबर-5 में पेश करना था। उसके पहले की प्रक्रिया के लिए उसे कमिश्नर के कार्यालय में उसे लग्जरी कार से लाया गया। इस बात की काफी चर्चा हो रही है कि एक रिश्वतखोर दरोगा और सिपाही इतना प्रोटोकॉल क्यों पा रहे हैं।