वाराणसी

BRICS सम्मेलन की सफलता पर काशी में विशेष पूजा, वैदिक मंत्रोच्चार के साथ बाबा विश्वनाथ-मां गंगा का जताया आभार

Varanasi latest news: वाराणसी में ब्रिक्स समूह में शामिल देशों के राष्ट्रध्वज और उनके राष्ट्राध्यक्षों के पोस्टर को हाथ में लेकर वेदपाठी बटुकों ने स्वस्तिवाचन के साथ द्वादश ज्योतिर्लिंगों का स्मरण किया और गंगाष्टकम का पाठ किया....
2 min read
• •
Updated: 14 Sep 2026, 1:37 PM IST
Varanasi news
मंत्रोचार करते बटुक, Pc- Rajesh Shukla (Varanasi nagar nigam brand ambassador)

BRICS Summit 2026: भारत की मेजबानी में सफलतापूर्वक संपन्न हुए 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और 'नई दिल्ली घोषणापत्र' को सर्वसम्मति से स्वीकार किए जाने पर काशी में सोमवार को विशेष पूजा-पाठ का आयोजन हुआ। गणेश चतुर्थी के अवसर पर सिद्धेश्वरी स्थित आध्यात्मिक परिसर में नमामि गंगे की टीम की ओर से वैदिक मंत्रोच्चार के साथ बाबा विश्वनाथ और मां गंगा के प्रति आभार प्रकट किया गया। आयोजन में महर्षि वेद विज्ञान विद्यापीठ के वेदपाठी बटुक भी शामिल हुए, जिन्होंने वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया।

किया गया गंगाअष्टकम का पाठ

कार्यक्रम के दौरान ब्रिक्स समूह में शामिल देशों के राष्ट्रध्वज और उनके राष्ट्राध्यक्षों के पोस्टर को हाथों में लेकर बटुकों ने स्वस्तिवाचन के साथ द्वादश ज्योतिर्लिंगों का ध्यान किया और गंगाष्टकम का पाठ भी किया गया। इसके साथ ही पूरे विश्व में शांति और विभिन्न देशों के बीच आपसी सहयोग बढ़ने की कामना की गई। आयोजकों के मुताबिक, विश्व के अलग-अलग देशों में चल रहे तनाव और विभिन्न देशों के बीच मतभेदों के बावजूद भारत ने संवाद और सहयोग की नीति को प्राथमिकता दी और ब्रिक्स के मंच को मजबूत करने का प्रयास किया है। वहीं, अध्यात्म की नगरी काशी में हुए इस आयोजन के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा को वैश्विक शांति के संदेश से जोड़ने का प्रयास किया गया।

नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक एवं नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर राजेश शुक्ला ने कहा कि वाराणसी के सांसद और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारत की प्राचीन संस्कृति और 'वसुधैव कुटुंबकम' की अवधारणा को वैश्विक मंच पर प्रमुखता से रखा है। प्रधानमंत्री ने कहा था कि भारत की सोच केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के अलग-अलग देशों के बीच संवाद, साझेदारी और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को भी महत्व देती है। राजेश शुक्ला ने कहा कि सम्मेलन में साझा हितों के मुद्दों पर अलग-अलग देशों के बीच सहमति बनना, वैश्विक सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है। भारत और चीन के बीच व्यापार तथा अन्य साझा विषयों पर सहयोग को भी उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के लिए सकारात्मक बताया है।

मजबूत होगा भारत और रूस का रिश्ता

राजेश शुक्ला के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच सम्मेलन के अलावा हुई बातचीत में रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता में हुए सम्मेलन ने विकास, सहयोग और वैश्विक शांति को लेकर भारत की भूमिका को और मजबूत किया है। इसके साथ ही भारत और रूस के रिश्ते और मजबूत होंगे। उन्होंने कहा कि भारत में जिस तरह से यह आयोजन हुआ, आगे चलकर यह एक मील का पत्थर साबित होगा।

Updated on:
14 Sep 2026, 1:37 PM IST
Published on: