
वाराणसी. लोकसभा चुनाव 2019 में अगर यूपी में महागठबंधन होता है तो उसमें मायावती जो चाहेंगी वही होगा। बसपा इसी रणनीति पर काम कर रही है। पहले छत्तीसगढ़ फिर मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी कांग्रेस के साथ गठबंधन से इनकार कर मायावती ने इसके संकेत दे दिये हैं। यूपी में समाजवादी पार्टी ने पहले ही मायावती की हर शर्त मानने को तैयार हो चुकी है। सपा कम खुद कम सीटों पर लड़कर बसपा को ज्यादा सीटें देगी। अखिलेश यादव के इस इकरारनामे के बाद बसपा ने सीटों पर अपने प्रत्याशी तय करने शुरू कर दिये हैं। इनमें वो सीटें हैं जहां बसपा को जीत की सबसे ज्यादा उम्मीद है। हालांकि इनमें वो सीटें भी शामिल हैं जिन पर समाजवादी पार्टी का भी बड़ा दावा है। हालांकि बताया जा रहा है कि महागठबंधन में सीटों पर सहमति लगभग बन गयी है। यही वजह है कि हम जिन सीटों के बारे में बताया जा रहा है वहां संभावित प्रत्याशियों को बसपा ने सक्रिय कर दिया है।
सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक मायावती का पूर्वांचल पर ज्यादा जोर है। यहां फिलहाल गाजीपुर, लालगंज, सोनभद्र, मछलीशहर, घोसी और सलेमपुर की सीट बसपा के खाते में जा रही है। इसके अलावा चंदौली, बलिया और मिर्जापुर की सीटें सपा को मिलेंगी। बसपा ने अपनी सीटों के लिये उम्मीदवार भी तय कर दिये हैं।
गाजीपुर से अफजाल अंसारी को टिकट
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक बसपा ने समझौते के तहत फाइनल सीटों पर प्रत्याशियों का चयन कर लिया है। इसमें गाजीपुर से अफजाल अंसारी का नाम है जो 2004 में मनोज सिन्हा को एक लाख 88 हजार 910 वोटों से हराया था। गाजीपुर में बसपा और सपा दोनों मजबूत हैं, ऐसे में महागठबंधन की जीत के चांसेज सबसे ज्यादा हैं। इसके अलावा मऊ की घोसी सीट से मुख्तार के बेटे अब्बास अंसारी या बालकिशुन चौहान के नाम पर विचार चल रहा है। मछली शहर, सलेमपुर और सोनभद्र सीटों पर भी प्रत्याशियों को लेकर जल्द ही फैसला हो सकता है। यहां बगावत के डर से बसपा अभी अंदरखाने भी नामों का खुलासा नहीं कर रही।
डुमरियागंज की सीट से भी बसपा के आफताब आलम का लड़ना तय बताया जा रहा है। आफताब और अफजाल अंसारी अपने कैंपेन में भी जुट गए हैं। हालांकि समाजवादी पार्टी अपनी सीटों पर किसे टिकट दे रही यह बात अभी अंदरखाने भी गुप्त रखी गयी है। शिवपाल यादव के पार्टी बना लेने के चलते सपा किसी तरह की बगावत नहीं चाहती और सही समय पर ही प्रत्याशियों के नाम सामने आएंगे। बताते चलें कि बसपा करीब 40 सीटों पर अपनी दावेदारी कर रही है और अखिलेश यादव की तरफ से बसपा को ज्यादा सीटें देने की शत्र मान भी ली गयी हैं।