
वाराणसी.गुजरात चुनाव में बीजेपी ने किसी तरह से अपनी इज्जत बचा ली है। नये साल में अनके राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके पहले यूपी के दो महत्वपूर्ण सीट पर उपचुनाव होने वाले हैं। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ व डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या ने अपनी संसदीय सीट क्रमश: गोरखपुर व फूलपुर से इस्तीफा दे दिया है जो अब स्वीकार कर लिया है, जिससे साफ हो जाता है कि नये साल की शुरूआत में ही इन सीटों पर उपचुनाव होंगे।
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पीएम मोदी की लहर में यूपी में बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिला है। इसके बाद प्रदेश की कमान सीएम योगी आदित्यनाथ को सौंपी गयी है। सीएम योगी व डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या ने प्रदेश के दो महत्वपूर्ण पद संभालने के लिए अपने संसदीय सीट से इस्तीफा दे दिया है इसके चलते वहां पर उपचुनाव होने वाले हैं। पहले ही माना जा रहा था कि निकाय व गुजरात चुनाव के बाद ही बीजेपी इन सीटों पर चुनाव करा सकती है, जिसकी मुख्य वजह थी कि इन सीटों पर उपचुनाव में बीजेपी को हार मिलती है तो विपक्ष को मजबूत होने का मौका मिल जायेगा और यूपी निकाय व गुजरात विधानसभा चुनाव में भगवा पार्टी को नुकसान हो सकता है। यूपी बीजपी के दोनों वरिष्ठ नेताओं के इस्तीफे स्वीकार हो जाने के बाद इन सीटों पर उपचुनाव का रास्ता साफ हो गया है।
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गोरखपुर के साथ फूलपुर में भी प्रतिष्ठा दांव पर
सीएम योगी का गोरखपुर की संसदीय सीट पर पांच बार से कब्जा था यह माना जाता है कि गोरक्षापीठ से जुड़ी इस सीट पर मंदिर के महंत को हराना बहुत कठिन है इसलिए सीएम योगी आदित्यनाथ इस सीट पर लगातार जीतते आये हैं। इस बार की कहानी अलग है यहां पर सीएम योगी किसे प्रत्याशी बनाते हैं और किसे जनता को समर्थन मिलता है इससे ही जीत व हार तय होगी। फूलपुर संसदयीय सीट बीजेपी के लिए बचाये रखना बहुत कठिन है। कभी पंडित नेहरू की सीट माने जाने वाली फूलपुर में बाद में सपा व बसपा का कब्जा रहता था और आजादी के पहली बार वर्ष २०१४ में पीएम मोदी की लहर में यहां पर बीजेपी का खाता खुला था। केशव प्रसाद मौर्या ने चुनाव जीत कर बीजेपी को राहत दिलायी थी लेकिन अब यहां पर होने वाले उपचुनाव में बीजेपी के पास इस सीट को बचाने रखने की बड़ी चुनौती है।
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कांग्रेस को मिली ताकत, महागठबंधन का हो सकता है प्रत्याशी
गुजरात चुनाव ने कांग्रेस को ताकत दी है अब यूपी की दो सीट पर होने वाले उपचुनाव में बीजेपी को पटखनी देने के लिए तैयारी शुरू हो गयी है। चर्चा है कि इन दोनों सीटों पर होने वाले उपचुनाव में बीजेपी विरोधी दल महागठबंधन बना कर प्रत्याशी खड़े कर सकते हैं यदि ऐसा होता है तो बीजेपी को यहां पर कमल खिलाने के लिए सारी ताकत लगानी होगी।
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