
वाराणसी. शहर के व्यस्तम मुस्लिम इलाके दालमंडी में अवैध बेसमेंट प्रकरण मिलने के बाद से सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार बैकफुट पर आ गयी है। सीएम योगी के अधिकरियों की मिलीभगत से ही यहां पर अवैध ढंग से बेसमेंट बनाया गया था जो एक छोटे शहर के बराबर भी हो सकता है। सीएम योगी से लेकर उनके मंत्री सुरेश खन्ना व अधिकारी लगातार अवैध बेसमेंट के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कह रहे हैं, लेकिन अभी तक कार्रवाई नहीं की गयी है।
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एसएसपी आरके भारद्वाज ने खुद ही इस अवैध बसेमेंट को पकड़ा था इसके बाद से एसएसपी ने लगातार यह बयान दिया है यदि वीडीए या अन्य सरकारी संस्थाओं को अवैध बेसमेंट हटाने की कार्रवाई के लिए फोर्स की जरूरत होगी तो उसे तुरंत ही उपलब्ध कराया जायेगा। इसके बाद भी वीडीए की हिम्मत नहीं हो पा रही है कि अवैध बेसमेंट के खिलाफ कार्रवाई की जाये। वीडीए ने इन अवैध बेसमेंट की गुणवत्ता की जांच भी करायी है जो बेहद कमजोर निकले हैं और इन बेसमेंट को ढहाया जा सकता है। आश्चर्य की बात है कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी इस प्रकरण को संज्ञान लिया है इसके बाद भी स्थानीय अधिकारियों कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
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काशी विश्वनाथ मंदिर के येलो जोन से 100 मीटर की दूरी पर हुआ निर्माण
काशी विश्वनाथ मंदिर के येलो जोन के 100 मीटर की दूरी पर ही अवैध बेसमेंट का निर्माण हुआ है। एसएसपी के खुलासे के बाद से दालमंडी को लेकर सियासी तूफान आ गया था। जिला प्रशासन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी इस खुलासे से नाराज थे इसलिए अधिक कार्रवाई नहीं हुई है। दालमंडी प्रकरण अब ठंडे बस्ते में जाता हुआ दिख रहा है।
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वरुणा कॉरीडोर के बाद दालमंडी प्रकरण ने सीएम योगी सरकार पर उठाये सवाल
वरुणा कॉरीडोर के रास्ते में आये हुए अतिक्रमण को नहीं हटाने के चलते पहले ही सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार की किरकिरी हो रही है ऐसे में दालमंडी में अवैध बेसमेंट प्रकरण ने सीएम योगी सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। पीएम नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में ही जब सीएम योगी सरकार फेल हो रही है तो प्रदेश के अन्य हिस्सों का क्या हाल होगा। सीएम योगी सरकार के मंत्री व विधायकों से अतिक्रमण करने वालों की सेटिंग है तो सरकार भी कार्रवाई नहीं करती है यही हाल सीएम योगी के चहेते अधिकारियों का भी है, जो महत्वपूर्ण मुद्दों को ठंडे बस्ते में डाल कर सरकार को गुमराह करने में जुटेे रहते हैं।
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