छात्रसंघ चुनाव में ही खर्च की राशि दिखाने के लिए करना पड़ता है गोलमाल, आम छात्रों के लिए नहीं रह गये हैं चुनाव
वाराणसी. प्रदेश के विश्वविद्यालय में नया सत्र शुरू हो गया है। परिसरों में प्रवेश कार्य के साथ छात्रसंघ चुनाव की सरगर्मी भी जोर पकड़ चुकी है। लिंगदोह कमेटी के अनुसार अधिकतम पांच हजार खर्च करके ही छात्रसंघ का चुनाव लड़ा जा सकता है। खर्च की सीमा आज कितनी प्रासंगिक रही गयी है। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में पत्रिका ने जब पूर्व पदाधिकारी व वर्तमान प्रत्याशियों के साथ इसकी चर्चा की तो सारे तथ्य निकल कर सामने आ गये।
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छात्रसंघ के पूर्व महामंत्री विकास सिंह ने कहा कि आज की छात्र राजनीति की स्थिति अलग हो चुकी है। सत्ता पक्ष से जुड़े छात्र संगठन धन व बाहुबल का प्रयोग करके चुनाव लड़ते हैं। पांच हजार रुपये में चुनाव लडऩा असंभव है। सही तरह से जांच करायी जाये तो सच्चाई निकल कर आयेगी। छात्रसंघ चुनाव 10 से 15 लाख में लड़े जाते हैं इतने पैसे में चुनाव असंभव है। महामंत्री पद के प्रत्याशी ऋषभ पांडेय ने कहा कि पांच हजार रुपये में विजिटिंग कार्ड तक नहीं छपवा सकते हैं। लिंगदोह के अनुसार ही चुनाव लडऩा पड़ता है लेकिन पांच हजार रुपये में चुनाव लडऩा संभव नहीं है। हरि ओम सिंह ने कहा कि कहा कि आज के परिवेश में पांच हजार रुपये क्या होते हैं। सामने वाला प्रत्याशी अधिक खर्च करता है तो हमें भी अधिक पैसे खर्च करने पड़ते हैं। आज की स्थिति ऐसी है कि पांच हजार के शूज पहनते हैं ऐसे में चुनाव खर्च की सीमा बढ़ानी चाहिए। शंशाक शेखर सिंह ने कहा कि पांच हजार रुपये में चुनाव लडऩा संभव नहीं है। गौरव कुमार ने कहा कि पांच रुपये खर्च करके चुनाव लडऩा संभव नहीं है वह मतदाताओं तक बात पहुंचाना संभव नहीं है।
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छात्रसंघ चुनाव में खर्च होती है 1 लाख से अधिक की रकम
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ छात्रसंघ चुनाव में प्रमुख प्रत्याशी 10 लाख से अधिक रकम खर्च करते हैं। नामांकन जुलूस व मतदान के दिन वाहनों में भर कर छात्रों के लाने में सबसे अधिक रकम खर्च होती है। प्रत्याशियों की आर्थिक स्थिति ठीक होती हे तो वह अपने संसाधन से सारी व्यवस्था कर लेते हैं, यदि उनकी स्थिति ठीक नहीं होती है तो मठाधीश की मदद से चंदा लेकर चुनाव लड़ते हैं। एक ही बार ही चुनाव लडऩे का मौका मिलता है इसलिए पानी की तरह पैसा बहाने में प्रत्याशियों को संकोच नहीं होता है।
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