वाराणसी

काशी में बाढ़ ने बढ़ाई मुसीबत, 1500 लोगों का पलायन, वार्निंग लेवल पर पहुंची गंगा

Flood Situation in varanasi: नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण सामने घाट, सलारपुर समेत 10 से अधिक ऐसे तटवर्ती इलाके हैं, जिनमें बाढ़ का पानी घुस चुका है।
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Sep 01, 2026
Varanasi news
Pc-Patrika

Flood in Varanasi:वाराणसी में बाढ़ ने अपना रूप दिखाना शुरू कर दिया है। एक तरफ गंगा नदी का जलस्तर अपने चेतावनी बिंदु पर पहुंच गया है, जिसमें 2 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी हो रही है, तो वहीं दूसरी तरफ वरुणा नदी के निकटवर्ती इलाकों में लोगों का पलायन शुरू हो गया है। कुल 361 परिवार ऐसे हैं जो अपना मकान छोड़कर सुरक्षित स्थान पर आश्रय लेने के लिए पहुंचे हुए हैं, जिनमें 1574 लोग हैं, जो अपना घर बार छोड़कर बाढ़ राहत शिविर और स्वजनों के यहां शिफ्ट कर चुके हैं। काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थित मौसम विभाग की माने तो काशी में अगले दो दिनों तक भारी बारिश हो सकती है, जिससे लोगों की मुश्किल है और बढ़ सकती है।

गलियों में नाव का संचालन

नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण सामने घाट, सलारपुर समेत 10 से अधिक ऐसे तटवर्ती इलाके हैं, जिनमें बाढ़ का पानी घुस चुका है। घरों में बाढ़ का पानी घुसने के कारण कई परिवार पिछले 15 दिनों से बाढ़ राहत शिविरों में आश्रय ले रहे हैं। वही गंगा नदी में उफान के कारण काशी के सभी प्रमुख घाट डूब चुके हैं। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर जलस्तर बढ़ने के कारण शवदाह छत और गलियों में शुरू हो चुका है। वहीं, गलियों में पानी भरने के कारण वहां भी नाव का संचालन किया जा रहा है। वही बाढ़ के पानी के बीच ही लोग शव को छत पर लेकर लोग पहुंच रहे हैं। वहीं, अस्सी घाट पर सुबह-ए-बनारस का मंच भी पूरी तरह डूब चुका है।

गंगा नदी के जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बाद नाद वा गोमती नदी भी उफान पर आ गई है। इसके कारण धरहरा से बेला की ओर जाने वाली सड़क पानी में डूब गई है, जिससे संपर्क मार्ग भी टूट गया है। गंगा का जलस्तर बढ़ने से ढाब क्षेत्र में भी बाढ़ का पानी अब खेतों में पहुंचने लगा है। सोता के दोनों किनारो पर स्थित गोबरहा, रामपुर, मुस्तफाबाद के निचले हिस्सों में स्थित खेत पूरी तरीके से पानी में डूब चुके हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। इन खेतों में सब्जी, फूल और धान की फसल लगाई गई थी। किसानों ने बताया कि फसल डूबने के कारण उन्हें काफी नुकसान हुआ है।

लोगों को निकालने के लिए एनडीआरएफ तैनात

वहीं दूसरी तरफ जिला प्रशासन ने गंगा और वरुणा नदी के तटवर्ती इलाकों में लगातार निगरानी बढ़ा दी है। बाढ़ से प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने के लिए एनडीआरएफ और जल पुलिस की टुकड़ी को तैनात किया गया है। इसके साथ ही बाढ़ राहत शिविर में प्रभावित लोगों के लिए अलग से व्यवस्था की गई है। जिला प्रशासन ने बताया है कि पीड़ित परिवारों को तीन से चार बार स्वच्छ भोजन और पानी की व्यवस्था कराई गई है। बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल के लिए डॉक्टरों की टीम को भी तैनात किया गया है। जिला प्रशासन ने बताया है कि बाढ़ के कारण हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। प्रभावित लोगों को उचित मुआवजा भी दिया जाएगा।

Updated on:
01 Sept 2026 09:15 am
Published on:
01 Sept 2026 09:15 am