वाराणसी

विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद केस: ‘मध्यस्थता नहीं, कानूनी प्रक्रिया से ही निकलेगा समाधान’, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर संत समिति का बड़ा बयान

काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद के मामले पर अखिल भारतीय संत समिति ने अपना पक्ष रखा है। समिति का कहना है कि मामला संवेदनशील है और कानूनी प्रक्रिया से ही इसका समाधान हो सकता है।
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Jul 13, 2026
Gyanwapi and vishwanath temple
Pc-Patrika

Shree Kashi Vishwanath Mandir and Gyanwapi Moscue Case: वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद के विवाद को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सीधे निर्णय देने के बजाए लोक अदालत और मध्यस्थता से समाधान निकल जाए। इस संबंध में 14 जुलाई को जिला एवं सत्र न्यायालय में मध्यस्थता की तिथि तय की गई थी। वहीं, अब इस मामले पर अखिल भारतीय संत समिति ने भी अपना पक्ष रखा है। समिति का कहना है कि यह मामला बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक महत्व का है। इसलिए इसका स्थाई समाधान केवल न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही निकल सकता है।

क्या बोले समिति के महामंत्री?

अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री जितेन्द्रानन्द सरस्वती ने कहा कि पूर्व में श्रीराम जन्मभूमि विवाद में भी सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर मध्यस्थता की प्रक्रिया अपनाई गई थी। उस समय तीन सदस्यीय पैनल गठित कर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाने का प्रयास किया गया, लेकिन बातचीत से कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकल सका था। अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री ने कहा कि न्यायालय के फैसले के बाद ही उस लंबे समय से चले आ रहे विवाद का समाधान संभव हो पाया था। इसी तरह ज्ञानवापी मामले में भी मध्यस्थता से सफलता मिलने की संभावना कम दिखाई दे रही है।

'मध्यस्थता से मामले का समाधान आसान नहीं'

जितेन्द्रानन्द सरस्वती ने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व से जुड़े मामलों में दोनों पक्षों के बीच मतभेद लंबे समय से बने हुए हैं। ऐसे में आपसी सहमति बनना आसान नहीं है। उन्होंने ने दावा किया कि यदि दोनों पक्ष पूरी गंभीरता और सक्रियता से मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल नहीं होते हैं तो किसी निष्कर्ष तक पहुंचना मुश्किल होगा।

जितेन्द्रानन्द के मुताबिक, श्रीराम जन्मभूमि, श्रीकृष्ण जन्मभूमि और काशी ज्ञानवापी जैसे विषय करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े हैं। इसलिए इन मामलों में संविधान और न्यायपालिका की निर्धारित प्रक्रिया के तहत अंतिम निर्णय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अदालत का फैसला ही सभी पक्षों के लिए स्वीकार्य और स्थायी समाधान का आधार बन सकता है। हालांकि, जितेन्द्रानन्द ने सर्वोच्च न्यायालय के सुझाव का सम्मान व्यक्त किया है।

क्या है मामला?

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को लेकर सीधा निर्णय देने का बजाय लोक अदालत और मध्यस्थता के माध्यम से समाधान निकालने का निर्देश दिया था। बता दें कि 21 और 23 अगस्त को 3 दिनों की विशेष लोक अदालत लगेगी, जहां दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठकर इस मामले में आपसी सहमति से फैसला लेना था। सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीद भी जताई थी कि इसमें सकारात्मक रास्ता जरूर निकलेगा। हालांकि, इस मामले में हिंदू और मुस्लिम पक्ष की अलग-अलग राय होने के बाद इस मामले में आपसी सहमति होने की उम्मीद नहीं है।

Updated on:
13 Jul 2026 04:19 pm
Published on:
13 Jul 2026 04:19 pm
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