
पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में पहले चरण में निकाय चुनाव होने हैं। 4 मई को मतदान होगा और नतीजे 13 मई को आएंगे। वाराणसी नगर निगम की जब से स्थापना हुई है तब से मेयर पद पर बीजेपी का ही कब्जा रहा है। वाराणसी नगर निगम के मेयर सीट पर कब्जा जमाने के लिए सभी राजनीतिक पार्टियां अपना जोर लगा रही हैं।
बीजेपी के इस अभेद किला को ढहाने के लिए सपा ने वाराणसी नगर निगम के उपसभापति और पांच बार निगम के पार्षद ओपी सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है। वहीं बीजेपी ने क्षेत्रीय मंत्री अशोक तिवारी को अपना प्रत्याशी बनाया है।
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कौन हैं ओपी सिंह ?
डॉक्टर ओपी सिंह पांच बार के पार्षद हैं। ओपी सिंह से अपनी राजनीति की शुरुआत छात्र जीवन से ही की है। बीएचयू से बीए, एमए, एलएलबी और पीएचडी की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से MSW भी किया है।
1995 से ओपी सिंह या उनके परिवार का कोई सदस्य पार्षद का चुनाव जीतता आया है। साल 2001 में सबसे ज्यादा वोटों से चुनाव जीतने का प्रदेश में ओपी सिंह के नाम रिकॉर्ड भी है। 2001 में वाराणसी नगर निगम में उपसभापति भी रह चुके हैं। साल 2012 में समाजवादी पार्टी वाराणसी के महानगर अध्यक्ष बने।
इसके बाद साल 2014 में ओपी सिंह सपा के प्रदेश सचिव बने। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने शहर उत्तरी विधानसभा से उन्हे पार्टी का प्रत्याशी बनाया। लेकिन, सपा और कांग्रेस का गठबंधन होने की वजह से यह सीट कांग्रेस खाते में चली गई। इस कारण ये विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ पाए।
वाराणसी इलाके में ओपी सिंह की जमीनी पकड़ अच्छी मानी जाती है। इसी के चलते सपा ने उन्हें अपना मेयर प्रत्याशी बनाया है। अब चुनाव परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा कि वाराणसी नगर निगम में अखिलेश की नैया को पार लगा पाते हैं या बीजेपी का वर्चस्व कायम रहेगा।
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2017 में मृदुला जायसवाल बनी थीं मेयर
साल 2017 में भाजपा की मृदुला जायसवाल मेयर बनी थी। उन्हें 42.63 प्रतिशत वोट मिले थे। वहीं कांग्रेस की प्रत्याशी शालिनी यादव 25.08 प्रतिशत वोट पाकर दूसरे नंबर पर रहीं। इसके अलावा 21.97 प्रतिशत वोट अन्य प्रत्याशियों को मिले। 1.18 प्रतिशत वोट नोटा पर पड़े थे।