मामले ने पकड़ा तूल तो लूट की जगह मारपीट का मुकदमा लिखने के लिए दबाव बनाने में जुटी पुलिस, जानिए क्या है कहानी
वाराणसी. पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गयी है। बीती देर रात डीरेका में होने वाले कवि सम्मेलन में भाग लेने आये कवियों के साथ ललिता घाट पर मारपीट व लूट की घटना हो गयी। आरोप है कि बदमाशों की पिटाई से घायल बदमाश जब थाने पहुंचे तो पुलिस सीमा विवाद में उलझ गयी। अपराधियों को पकडऩे की जगह दशाश्वमेध व चौक पुलिस एक-दूसरे के क्षेत्र का मामला बता कर कार्रवाई से बचती रही। बाद में मामले ने जब तूल पकड़ा तो दशाश्वमेध पुलिस ने तहरीर लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि वादी पर पुलिस ने लूट की जगह मारपीट का मुकदमा लिखने का दबाव बनाया हुआ है।
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डीरेका में होने वाले कवि सम्मेलन में भाग लेने के लिए लखीमपुर खीरी से दुर्गेश दुबे व बाराबंकी से कनक तिवारी आये थे। इनके साथ डा.अनिल सिंह भी थे। तीनों ही बीती रात काशी विश्वनाथ मंदिर में जाकर दर्शन करते हैं और फिर मणिकर्णिका घाट घूमते हुए हरिश्चन्द्र घाट की तरफ जाने लगे थे। कवियों का आरोप है कि ललिता घाट के पास एक दर्जन की संख्या में बदमाशों ने उन्हें घेर लिया। बदमाशों ने दुर्गेश के गले की चेन, कनक का मोबाइल व उनके पास रखा हुआ २० हजार रुपये भी लूट लिए। कवियों ने जब विरोध किया तो बदमाशों ने उनकी जमकर पिटाई कर दी। मारपीट में कवियों के सिर में गंभीर चोट आयी है। घटना के बाद पीडि़त सीधे चौक थाने पहुंचे और वहां मौजूद पुलिसकर्मियों को घटना की जानकारी दी। आरोप है कि पुलिस ने अपने थाना क्षेत्र का मामला नहीं होने की बात कहते हुए कवियों को दशाश्वमेध थाने जाने को कहा। इसके बाद काफी देर तक पुलिस थाना विवाद में उलझी रही। बाद में यह मामला दशाश्वमेध थाना क्षेत्र का निकला और पुलिस ने तहरीर लेकर कार्रवाई शुरू की है। मौके पर गये दरोगा ने जब घटना के बाबत स्थानीय लोगों से पूछताछ की है तो कुछ लोगों के नाम निकल कर सामने आये हैं।
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