वाराणसी

निकाय चुनावः प्रत्याशियों और समर्थकों ने सोशल मीडिया पर छेड़ी प्रचार मुहिम

उधर चुनाव प्रचार थमा, इधर लोगों ने फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप पर बोला हमला। हर क्षण गिरते रहे मैसेज व फोटो।
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Nov 25, 2017
सोशल मीडिया पर चुनाव प्रचार
सोशल मीडिया पर चुनाव प्रचार

वाराणसी. नगर निकाय चुनाव के लिए वाराणसी में रविवार को मतदान होना है। इसके लिए शुक्रवार की शाम पांच बजे ही चुनावी शोर थम गया। गलियों और सड़कों पर तो वाकई शोर थम गया, लेकिन यह ट्रांसफर हो गया सोशल मीडिया पर। शुक्रवा की शाम से ही सोशल मीडिया पर प्रचार की ऐसी बारिश शुरू हुई कि पूछना क्या। एक सेकेंड में कितने मैसेज व फोटो गिर रहे थे कि उन्हें गिनना मुश्किल था। राजनीतिक दलों ने इस मीडिया को चुनावी अखाड़े में तब्दील कर दिया। सोशल मीडिया के हर विंग का राजनीतिक दलों ने भरपूर प्रयोग किया। जैसे-जैसे मतदान का वक्त नजदीक आता जा रहा है यह हमला और तेज होता जा रहा है। मतदान के वक्त तक इसके और तेज होने की आशंका जताई जा रही है। इस संबंध में जब जिला निर्वाचन अधिकारी और डीएम योगेश्वर राम मिश्र से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनके अटेंडेंट ने बताया साहब राउंड पर हैं।

प्रतिद्वंद्वियों पर जबरदस्त हमला, रेटिंग भी कर डाली

कुछ प्रत्याशियों ने जनता से मार्मिक अंदाज में की अपील तो कुछ ने प्रतिद्वंद्वियों पर किया हमला। कुछ ऐसे फोटोग्राफ्स डाले गए जिसमें प्रत्याशियों की जीत हार को लेकर नंबरिंग तक कर दी गई। कोई फेसबुक पर अपने प्रचार को वायरल कर रहा था तो कोई ट्विटर पर। इसमें व्हाट्सएप, मेसेंजर यहां तक कि इंस्ट्राग्राम और यूट्यूब का भी जमकर उपयोग किया गया। आलम यह था कि स्मार्ट और एंड्रायड फोन पर आम दिनों में अगर 1000 मैसेज गिरते रहे तो यह शनिवार को आठ-दस तक बढ़ गया। फोन हैंग करने लगे।

महीने भर का काम 48 घंटे में

पार्षद प्रत्याशियों ने ह्वाट्सएप को बनाया प्रचार का साधन। विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुप प्रचार सामग्री से भरे रहे। प्रायः पार्षद प्रत्याशी हाथ जोड़े अपनी फोटो के साथ मार्मिक अपील करता नजर आया। ऐसे में मेयर प्रत्याशी भला क्यों पीछे रहें। यह तो सच है कि मेयर का कोई भी प्रत्याशी हो सभी 90 वार्डों में दस्तक नहीं दे सका। ऐसे में उन्होंने फेसबुक पर ही मतदाताओं से क्षमा याचना करते हुए संपर्क साधने की कोशिश की। कुछ ने घोषणा पत्र भी डाल दिया। उन्होंने अपने वॉल पर पोस्ट डाली तो उनके फेसबुक मित्र उसे लाइक कर वायरल करने लगे। ये तो प्रायः हर फेसबुक यूजर जानता है कि अगर कोई पोस्ट उसने अपनी वॉप पर डाली तो उसके जितने मित्र होंगे वहां तक तो वह पोस्ट पहुंचेगी ही साथ में उसके एफबी मित्रों ने उसे लाइक किया तो पोस्ट उसके मित्रों और इसी तरह से चक्रवृद्धि ब्याज की तरह वह पोस्ट वायरल होती रहेगी। इससे बेहतर प्रचार का साधन और कोई हो नहीं सकता। इसे मेयर और पार्षद प्रत्याशियों ने बखूबी समझा और उसका भरपूर इस्तेमाल भी किया। इसमे सपा, कांग्रेस, भाजपा, आम आदमी पार्टी यहां तक कि बसपा प्रत्याशिों ने भी खूब इस्तेमाल किया। प्रत्याशियों ने वादे भी किए कि उन्हें मत व समर्थन दें, वो जीत गई तो काशी का कायाकल्प हो जाएगा।

इस तरह प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिले के बाद से शुक्रवार की शाम तक जितना प्रचार नहीं किया उसका कई गुना ज्यादा वे शुक्रवार की शाम के बाद से कर रहे हैं। अब तो वे बाकायदा एक-एक मतदाता तक पहुंच रहे है। सीधा संपर्क कर पा रहे हैं। उनकी पोस्ट पर तमाम कमेंट भी आ रहे हैं, ऐसे में उन्हें अपनी कमजोरियां भी पता चल रही हैं। ऐसा नहीं कि यह केवल फेसबुक से हो रहा है बल्कि व्हाट्सएप, मेसेंजर, इंस्ट्राग्राम और ट्विटर पर भी यही आलम है। यानी कुल मिला कर सोशल मीडिया ने वो काम कर दिया है जो वे महीने दो महीने में नहीं कर पाते। अब तो चर्चा यह है कि जिसका सोशल मीडिया नेटवर्क जितना तगड़ा होगा जीत के करीब वही पहुंचेगा। कुछ ने तो वीडियो बना कर सोशल मीडिया के हर विंग का भरपूर इस्तेमाल किया।

Published on:
25 Nov 2017 07:49 pm
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