वाराणसी

बीजेपी के सहयोगी दल के नेता ने की शिवपाल यादव से मुलाकात, बंद कमरे में हुई वार्ता

लोकसभा चुनाव 2019 के पहले बदल सकता है सियासी समीकरण, बीजेपी की बढ़ जायेगी परेशानी

2 min read
Jun 15, 2018
 Shivpal Yadav
Shivpal Yadav

वाराणसी. लोकसभा चुनाव 2019 में अभी काफी समय बाकी है लेकिन राजनीति जिस तरह से करवट बदल रही है उससे रोज नये सियासी समीकरण जन्म ले रहे हैं। अखिलेश यादव व मायावती की पार्टी गठबंधन करने वाली है। ऐसे में पीएम नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस के सर्किट हाउस में शिवपाल यादव व बीजेपी के सहयोगी दल के नेता की मुलाकात हुई है। बंद कमरे में 10 मिनट तक दोनों नेता ने वार्ता की है जिसके बाद से बीजेपी की परेशानी बढ़ सकती है।
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सर्किट हाउस में शिवपाल यादव व सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर दोनों ही ठहरे हुए थे और शुक्रवार की सुबह खुद ओमप्रकाश राजभर सीधे शिवपाल यादव के कक्ष में जाते हैं और उनसे मुलाकात करते हैं। दोनों नेताओं की बंद कमरे में 10 मिनट तक मुलाकात होती है। दो विरोधी गठबंधन के नेताओं के मिलने से सियासत गरम हो गयी है। शिवपाल यादव इसे शिष्टाचार वाली भेंट बता रहे हैं तो ओमप्रकाश राजभर का कहना है कि जब यूपी में सपा सरकार थी तो शिवपाल यादव ने उनकी बहुत मदद की थी इसलिए मिलने चले गये। ओमप्रकाश राजभर के बेटे अरविंद राजभर की २१ जून को शादी है। माना जा रहा है कि ओमप्रकाश राजभर आमंत्रण देने भी जा सकते हैं लेकिन सबसे बड़ी बात है कि ओमप्रकाश राजभर ने शिवपाल यादव से भेंट करके बीजेपी को साफ संकेत दे दिया है यदि गठबंधन में उनके दल की बात नहीं सुनी गयी तो उनके पास सपा से गठबंधन करने का विकल्प खुला हुआ है जो बीजेपी के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
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बीजेपी के लिए तगड़ा झटका होगा सुभासपा का साथ छोडऩा
यूपी चुनाव 2017 में बीजपी व सुभासपा ने गठबंधन किया हुआ है। यूपी में सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार आने के बाद से सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। यूपी सरकार के गठन के कुछ माह बाद से ही सुभासपा व बीजेपी के रिश्तों में खटास पैदा हो गयी है। ओमप्रकाश राजभर लगातार बीजेपी पर हमला बोल रहे हैं। कभी भ्रष्टाचार, कभी सीएम का जाति कार्ड तो कभी शराबबंदी को लेकर मुद्दा बनाया हुआ है। ऐसे में कायस लगने लगे हैं कि लोकसभा चुनाव 2019 में सुभासपा को गठबंधन के तहत संसदीय सीट नहीं मिलती है तो ओमप्रकाश राजभर बीजेपी से गठबंधन तोड़ सकते हैं यदि ऐसा होता है तो बीजेपी की राह कठिन हो जायेगी। यूपी में राजभरो के सबसे बड़े नेता ओमप्रकाश राजभर माने जाते हैं। बीजेपी से अति पिछड़े तेजी से दूर होते जा रहे हैं जिसका उदाहरण कैराना, फूलपुर व गोरखपुर उपचुनाव में भगवा दल को मिली हार को माना जा रहा है। यदि ओमप्रकाश राजभर भी बीजेपी से दूर हो जाते हैं तो महागठबंधन की राह आसान हो जायेगी।
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Published on:
15 Jun 2018 01:17 pm
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