हर की नगरी में श्रीहरी की पूजा

अनंत चतुर्दशी से शुरू हुई रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला
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Sep 15, 2016
Ramnagar k Ramlila
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वाराणसी. हर-हर महादेव की नगरी काशी में बृहस्पतिवार को अनंत चतुर्दशी के दिन श्रीहरी की विधि-विधान से पूजा की गयी। शास्त्रों के अनुसार भाद्र शुक्ल चतुर्दशी के दिन ही अनंत चतुर्दशी का पावन पर्व होता है और प्रभु श्रीहरी की पूजा करने से भक्तों के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।
पृथ्वी को राक्षसों से मुक्त करने के लिए अवतार लेने वाले श्रीहरी अर्थात भगवान विष्णु के भक्तों के लिए यह दिन बहुत खास होता है। भक्त व्रत रखते हुए श्रीहरी कथा का वाचन करते हैं और कामनाओं की पूर्ति के लिए 14 गंाठों के धागे को हाथों में बांधा। प्रभु श्री भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद प्रभु की कथा सुनी और ब्राह्मणों का दान कर उनका आशीर्वाद लिया। काशी में पहले से ही सोरहिया मेला चल रहा है और अनंत चतुर्दशी के दिन मेले का महत्व और बढ़ जाता है। भारी संख्या में भक्तों ने लक्ष्मीकुंड स्थित मां लक्ष्मी के मंदिर में पूजन किया और माता का आशीर्वाद मांगा।


अनंत चतुर्दशी से शुरू हुई रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला
अनंत चतुर्दशी से रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला का शुभांरभ हो गया। एक माह तक चलने वाली रामलीला देखने के लिए देश-विदेश से लोग आते हैं। रामलीला के पहले दिन रावण, कुंभकर्ण व विभिषण का जन्म हो हुआ। रावण वह उसके राक्षस भाईयों ने प्रभु से आशीर्वाद लेकर मानव व ऋषियों पर जुल्म करना शुरू कर दिया। जबकि विभिषण ने भगवान से प्रभु भक्ति का आशीर्वाद मांगा था। रावण के आतंक से त्रस्त होकर देवताओं ने प्रभु श्रीहरी की गुहार लगायी थी जिस पर प्रभु ने राम अवतार में जन्म लेकर रावण का वध करने का आशीर्वाद दिया था। रामनगर की रामलीला में पहले दिन इन्हीं चीजों का मंचन किया गया है। क्षीर सागर में विराजमान प्रभु श्री विष्णु की आरती व पूजा के साथ रामलीला के प्रथम दिन पर विराम लगाया गया। परम्परा के अनुसार रामलीला का शुभारंभ काशी नरेश अनंत नारायण सिंह की पूजा के साथ हुआ। इस अवसर पर महाराज बनारस की शाही सवारी भी निकलती है और पीएससी की टुकड़ी भी सलामी देती हैं।


Published on:
15 Sept 2016 09:19 pm