प्रयागराज में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर नाबालिगों के यौन शोषण का आरोप लगा है। पुलिस उन्हें कभी भी गिरफ्तार कर सकती है।
Shankaracharya Avimukteshwarananda Arrest News: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर बहुत गंभीर आरोप लगे हैं। उन पर नाबालिग बच्चों के यौन शोषण का आरोप है। इस मामले में POCSO एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस जांच तेज कर रही है और माना जा रहा है कि कभी भी गिरफ्तारी हो सकती है।
यह मामला पिछले साल माघ मेले और महाकुंभ के दौरान शुरू हुआ। आरोप है कि शंकराचार्य के शिविर या आश्रम में दो नाबालिग लड़कों (उम्र 14 और 17 साल के आसपास) का यौन शोषण हुआ। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी, जो रामभद्राचार्य के शिष्य हैं और कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मामले में वादी हैं। उन्होंने POCSO स्पेशल कोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने दावा किया कि कम से कम 20 बच्चों के साथ ऐसा हुआ हो सकता है। याचिका में गौ-रक्षा आंदोलन या अन्य विवादों से जुड़ी साजिश का भी जिक्र था, लेकिन मुख्य आरोप यौन शोषण के हैं। शुरुआत में पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की, इसलिए कोर्ट में याचिका गई। 21 फरवरी 2026 को प्रयागराज की स्पेशल POCSO कोर्ट (जज विनोद कुमार चौरसिया) ने झूंसी थाने को FIR दर्ज करने का आदेश दिया। इसके कुछ घंटों बाद 22 फरवरी की रात FIR दर्ज हुई।
FIR झूंसी थाने में दर्ज हुई है। इसमें शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद ब्रह्मचारी (या मुकुंदानंद गिरी) और 2-3 अज्ञात लोगों के नाम हैं। POCSO एक्ट की धाराएं 3, 4(2), 5, 6, 9, 17 आदि और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं 69, 74, 75, 76, 79, 109, 351(3) लगाई गई हैं। ये धाराएं यौन हमला, बार-बार शोषण और बच्चों के खिलाफ अपराध से जुड़ी हैं। आरोप है कि 'गुरु सेवा' के बहाने शोषण किया गया।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों को पूरी तरह झूठा और बनावटी बताया है। उन्होंने कहा कि बच्चे उनके गुरुकुल या शिविर में कभी आए ही नहीं। वे आरोपों को राजनीतिक साजिश या अपमान करने की कोशिश बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि जांच में सच सामने आएगा और वे कानून का सामना करेंगे। पुलिस के आने पर वे सहयोग करने की बात कही। एक महिला भक्त के रोने पर उन्होंने समझाया कि गुरु में गड़बड़ी निकले तभी रोना चाहिए।
FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है। प्रयागराज की झूंसी थाने की टीम वाराणसी गई है ताकि शंकराचार्य का बयान दर्ज कराया जा सके। दोनों पीड़ित बच्चों का मेडिकल परीक्षण कराने की तैयारी है। मेडिकल रिपोर्ट और बयान दर्ज होने के बाद गहन जांच होगी। इलेक्ट्रॉनिक सबूत, फोरेंसिक जांच और डिजिटल सामग्री की जांच भी शामिल है। पुलिस हिरासत या गिरफ्तारी की कार्रवाई कभी भी हो सकती है।