वाराणसी

शंकराचार्य का बयान: मेरे ऊपर कुकर्म का आरोप लगाने वाला अपराधी, गौ-हत्यारों से जुड़ा…अपनी सुरक्षा को लेकर कह दी ये बात

यौन शोषण के आरोपों में घिरे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने आरोप लगाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी पर हिस्ट्रीशीटर और गौ-हत्यारों से संबंध होने का दावा किया है। 21 फरवरी को कोर्ट तय करेगा एफआईआर या याचिका खारिज होगी। सुरक्षा और 2027 चुनाव को लेकर जानिए क्या कहा?

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Feb 15, 2026
ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने खिलाफ लगे यौन शोषण के आरोपों और कोर्ट में चल रहे मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी के आपराधिक इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि यह पूरा विवाद गोरक्षा की उनकी मुहिम से जुड़ा है। कोर्ट 21 फरवरी को तय करेगा कि मामले में एफआईआर दर्ज होगी या याचिका खारिज की जाएगी।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मीडिया से बातचीत में अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि जो लोग खुद हिस्ट्रीसीटर हैं। गौ हत्यारों से जिनका संबंध है। वही आज उनके खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटा रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने अपनी बात न्यायालय के समक्ष रख दी है। उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है।

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आशुतोष ब्रह्मचारी ने शंकराचार्य के खिलाफ कोर्ट में दायर किया वाद

गौरतलब है कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य और शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी ने शंकराचार्य पर दो शिष्यों के यौन शोषण का आरोप लगाते हुए कोर्ट में वाद दायर किया है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। 21 फरवरी को यह स्पष्ट होगा कि शंकराचार्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी या मामला खारिज कर दिया जाएगा।

उनका गो-तस्करी और गोहत्या से जुड़े लोगों से संबंध

शंकराचार्य ने आरोप लगाने वाले पर पलटवार करते हुए कहा कि उनका अतीत विवादों से जुड़ा रहा है। उन्होंने दावा किया कि मीडिया में पहले भी ऐसी खबरें सामने आ चुकी हैं। जिनमें गो-तस्करी और गोहत्या से जुड़े लोगों से संबंधों के आरोप लगाए गए थे। उनका कहना है कि गोरक्षा और गोहत्या बंद करने की मुहिम चलाने के कारण कुछ लोग उनके खिलाफ अभियान चला रहे हैं।

हमने कभी सुरक्षा नहीं मांगी भगवान पर भरोसा

अपनी सुरक्षा के सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि उन्होंने कभी किसी से सुरक्षा की मांग नहीं की। नागरिकों की सुरक्षा करना सरकार का दायित्व है। यदि राज्य को आवश्यकता लगेगी तो वह स्वयं निर्णय लेगा। उन्होंने कहा कि उनका विश्वास भगवान और समाज में है।

धार्मिक और राजनीतिक नेतृत्व की भूमिकाएं अलग-अलग रहनी चाहिए

धर्म और राजनीति के संबंध पर उन्होंने कहा कि समाज को इस विषय पर गंभीर चिंतन करना चाहिए। उनके अनुसार, धार्मिक और राजनीतिक नेतृत्व की भूमिकाएं अलग-अलग रहनी चाहिए। आगामी 2027 के चुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि वे किसी विशेष व्यक्ति का समर्थन नहीं करते। उनका मानना है कि जो भी मुख्यमंत्री बने, वह कानून का पालन करने वाला और जनता के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। नेतृत्व का फैसला जनता करती है।

Updated on:
15 Feb 2026 01:19 pm
Published on:
15 Feb 2026 11:52 am
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