
Ram Mandir Chanda Chori Act In Parliament : संसद परिसर में राम मंदिर से जुड़े मुद्दे पर विपक्षी सांसदों द्वारा किए गए सांकेतिक प्रदर्शन के बाद उपजे विवाद के बीच रविवार को वाराणसी में अखिल भारतीय संत समिति की महाबैठक आयोजित की गई। बैठक में देश के विभिन्न राज्यों से आए अखिल भारतीय संत समिति के पदाधिकारियों और काशी विद्वत परिषद के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में मुख्य रूप से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव द्वारा संसद परिसर में किए गए सांकेतिक प्रदर्शन और संत समाज से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। संतों ने इसे सनातन परंपरा और साधु-संतों के सम्मान से जुड़ा विषय बताते हुए देशभर में अभियान चलाने का एलान किया है।
बैठक के बाद अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि संत समाज अब चुप नहीं बैठेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार हिंदू साधु-संतों और सनातन परंपरा को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन धार्मिक प्रतीकों और संतों का अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुछ विपक्षी नेताओं ने पहले भी राम जन्मभूमि को लेकर विवादित बयान दिए थे और अब संसद परिसर में जिस प्रकार का सांकेतिक प्रदर्शन किया गया, उसने करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं को आहत किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर निर्माण के समय भी कुछ राजनीतिक दलों ने चंदा अभियान का विरोध किया था और अब देश की संसद में राम मंदिर चंदा चोरी को लेकर संतों के भेष में सांकेतिक प्रदर्शन किया।
महामंत्री ने कहा कि अगर भेष धारण करना ही था तो टिन्नू यादव का भेष धारण किए होते। पप्पू यादव और टिन्नू यादव का नाम भी मैच हो जाता। अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है और संत समाज सनातन शंखनाद अभियान शुरू करेगा। इसके तहत देश के सभी राज्यों और जिलों में सभाएं आयोजित कर विपक्ष और उनके नेताओं की पोल खोली जाएगी। उन्होंने कहा कि संत समाज उन नेताओं के खिलाफ अभियान चलाएगा जो हिन्दू विरोधी हैं। बैठक में यह भी बताया गया कि अभियान के पहले चरण के तहत कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सांसद पप्पू यादव और समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद के खिलाफ वाराणसी में एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। संतों ने कहा कि यह केवल शुरुआत है और आगे भी कानूनी एवं लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रहेगा।
बैठक में मौजूद संतों और विद्वानों ने एक स्वर में कहा कि सनातन परंपरा, संत समाज और धार्मिक आस्थाओं के सम्मान से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने लोगों से सामाजिक सौहार्द बनाए रखते हुए कानून के दायरे में रहकर अपने विचार व्यक्त करने की अपील की। बैठक के अंत में देशभर में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाने और विभिन्न जिलों में संत सभाओं के आयोजन का निर्णय लिया गया।