विदिशा

दो हजार साल प्राचीन खाम बाबा पर पूजा से विवाद, पुलिस पहुंची

सदियों से खामबाबा की पूजा करता आ रहा है ढीमर समाज
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Jul 09, 2018
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दो हजार साल प्राचीन खाम बाबा पर पूजा से विवाद, पुलिस पहुंची

विदिशा. ईसा पूर्व के पुरास्मारक हेलियोडोरस स्तंभ को ढीमर समाज खाम बााबा के रूप में सदियों से पूजा आ रहा है। अब यह स्मारक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन है। लेकिन ढीमर समाज द्वारा पूजा बदस्तूर जारी है। सोमवार को जब लटेरी तहसील के करीब 35 लोग खामबाबा पर पूजा करने गए तो एएसआई और पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस पर विवाद हुआ और काफी देर तक बहस चलती रही।

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लटेरी के गोपालपुर से ट्राली में समाज के लोगों को लेकर आए हरिमोहन भोई ने बताया कि खामबाबा पीढिय़ों से हमारे देवता हैं और पूजे जाते हैं। साल में एक बार हम लोग यहां जरूर पूजा करने आते हैं। आज भी ऐसा ही कर रहे थे। करीब 35 लोग हमारे साथ आए हैं। लेकिन हमें पूजा करने से रोक दिया गया। चौकीदार के कहने पर वे लोग बाहर गेट पर ही भजन-कीर्तन करने लगे तो भी यहां के अधिकारी मेहतो ने हमें वहां से भी उठवा दिया। घर-परिवार की खुशहाली के लिए हमारा समाज हर साल यहां की पूजा जरूर करता है।

पूर्व सरपंच दयाल गिरी ने बताया कि पुलिस और एएसआई ने तीसरी बार यहां लोगों को पूजा करने से रोका है। यह ठीक नहीं है। इसकी शिकायत सीएम से की जाएगी। पूजा करने से कोई नहीं रोक सकता। ये हमारे धर्म और भावनाओं का मामला है। एएसआई ने पुलिस को भी बुलवा लिया। सब इंस्पेक्टर स्वराज डाबी कहते हैं कि पहले पूजा की अनुमति थी, अब नहीं है। ऐसे कैसे हो सकता है। पूजा करने से कैसे रोका जा सकता है। बाद में किसी तरह सांकेतिक पूजा के बाद लोगों को परिसर से बाहर किया गया।

खामबाबा पर है पूजा का उल्लेख
ईसा पूर्व करीब 150 वर्ष पूर्व का यह हेलियोडोरस स्तंभ दरअसल गरूड़ध्वज है जो विष्णु मंदिर के सामने था। एक ग्रीक हेलियोडोरस ने वैष्णव धर्म को स्वीकार कर यह स्तंभ लगवाया था, इसीलिए इसे हेलियोडोरस स्तंभ कहा जाने लगा। स्तंभ के चबूतरे पर खम्बे का इतिहास लिखा है, जिस पर स्पष्ट है कि इस खम्बे को खांब बाबा कहते हैं और ज्यादातर ढीमर लोग इसे पूजते हैं।

पूजा के नाम पर प्राचीन स्तंभ पर सिन्दूर, रोरी आदि लगाकर यहां थावर करने की तैयारी थी, उसे रोका है। झंडा भी परिसर में नहीं लगेगा। वे अंदर ही खाना भी खाना चाह रहे थे। एक-एक कर इतने लोग खामबाबा से गले मिलते हैं। यह संभव नहीं है। इस लिए पुरातत्व के नियमों तहत ही परिक्रमा करने को कहा था।
संदीप मेहतो, कनिष्ठ संरक्षण सहायक विदिशा

Published on:
09 Jul 2018 03:48 pm