
विदिशा। संस्कृत भारती के आयोजन में विदिशा के कामधेनू गार्डन में प्राचीन सिक्कों की अनूठी प्रदर्शनी लगाई जा रही है। महीदपुर उज्जैन की पुरातत्व अकादमी के चेयरमेन डॉ. आरसी ठाकुर ने प्राचीन भारतीय मुद्राओं का अनूठा संसार प्रदर्शित किया। इस प्रदर्शनी में उन्होंने 2700 साल पुराने सिक्के भी प्रदर्शित किए जाएंगे। कुषाणों के समय की 2200 साल पुरानी स्वर्ण मुद्राएं भी यहां रखे गए हैं। सोने, चांदी, तांबे, एल्यूमीनियम और मिट्टी के भी सिक्के प्रदर्शनी में शामिल हो रहे हैं।
डॉ. ठाकुर ने बताया कि प्रदर्शनी में खासकर मालवा अंचल में प्रचलित सिक्के रखे गए हैं। इसमें सबसे विशेष राजा विक्रमादित्य के समय के सिक्के दिखाए गए हैं, जिसमें युद्ध का नाद करते हुए दिखाया गया है। ये सिक्के 2100 साल पुराने हैं। इसी तरह 2500 साल पुरोन सिक्कों में राम, लक्ष्मण और सीता को वन गमन के दौरान दिखाया गया है।
2100 वर्ष पुराने सिक्कों में शिव पार्वती विवाह के दृश्य दिखाए गए हैं। विक्रमादित्य के सिक्कों में अश्वमेघ यज्ञ भी दिखाई दे रहा है। डॉ. ठाकुर के मुताबिक सबसे ज्यादा अश्वमेघ यज्ञ विदिशा में ही हुए हैं। सम्राट हर्षवर्धन के सिक्के भी यहां 590-647 ईसवी के मौजूद हैं। प्रदर्शनी में ऐसे सिक्के भी रखे गए हैं, जिनमें नदियों को मानवरूप में दिखाया गया है।
प्रदर्शनी स्थल को देशी अंदाज में सजाया गया है। पलाश के पत्तों की बनी पत्तलों से पूरे परिसर को सजाया गया, इसी पृष्ठभूमि पर सिक्कों का विवरण देते फ्लैक्स लगाए गए थे। विदिशा से संबंधित राजा रामगुप्त और पुष्यमित्र शुंग, उदयादित्य आदि के सिक्के भी यहां प्रदर्शित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही राजा विक्रमादित्य के सिक्कों समेत देश के विभिन्न राजवंशों के सिक्कों की तीन दिवसीय अनूठी प्रदर्शनी नगर में शुरू होगी। इसमें 2000 प्राचीन सिक्कों को प्रदर्शित किए जा रहे हैं। राजा विक्रमादित्य के सिक्कों के साथ ही ईसा पूर्व के ढेरों सिक्के यहां प्रदर्शित किए जा रहे हैं।