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फिल्म से GST का सीन काटने का मतलब, सरकार को है पॉलिसी कमजोर होने का अहसास- देखें वीडियो

तमिल फिल्म 'मर्सल' में जीएसटी के सीन को लेकर हुए विवाद पर एक्टर पीयूष मिश्रा ने पत्रिका के सामने रखी अपनी बेबाक राय।
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भोपाल

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Vikas Verma

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Updated: 3 Nov 2017, 3:51 PM IST

piyush mishra

भोपाल। एक ओर जहां फिल्मों के सेंसर पर सरकार ने एक कमेटी बना रखी है,वहीं सरकार स्वयं ही सेंसर की केंची चला रही है। इसका कारण सरकार की कमजोर नीति हो सकती है यह कहना है एक्टर पीयूष मिश्रा का। दरअसल तमिल फिल्म 'मर्सल' में जीएसटी के सीन को लेकर हुए विवाद पर एक्टर पीयूष मिश्रा कहते हैं कि सरकार इतनी कमजोर क्यों है? क्या उसे अपनी पॉलिसी पर भरोसा नहीं है?

एक सिनेमा के माध्यम से अगर किसी पॉलिसी के बारे में दिखा दिए जाने से क्या वो हिल गई है? इससे सरकार को चोट पहुंचेगी और लोग कंवेंस हो जाएंगे। जीएसटी का डायलॉग काट देने का मतलब है कि सरकार को अपनी पॉलिसीज के कमजोर होने का अहसास है कि कहीं हमने यह चीजें गलत तो नहीं कर दी।

सरकार इतनी कमजोर क्यों है? क्या उसे अपनी पॉलिसी पर भरोसा नहीं है? एक सिनेमा के माध्यम से अगर किसी पॉलिसी के बारे में दिखा दिए जाने से क्या वो हिल गई है? इससे सरकार को चोट पहुंचेगी और लोग कंवेंस हो जाएंगे। अगर पॉलिसीज अप्लाई की हैं तो उन पर भरोसा रखो। हां, लोग जो मन आए वो अभिव्यक्त करें ऐसा नहीं करने देना चाहिए वरना तो जंगल राज हो जाएगा। सेंसर होना चाहिए लेकिन हर कंट्री का एक दायरा होता है।

हिन्दुस्तान के परिवेश के हिसाब से कुछ एक चीज पर पाबंदी होनी चाहिए। लेकिन जीएसटी का डायलॉग काट देना गुलाज के सींस काट दिए गए ये तो कोई बात नहीं हुई। मुझे लगता है कि सरकार को अपनी पॉलिसीज के कमजोर होने का अहसास है कि कहीं हमने यह चीजें गलत तो नहीं कर दी। जो पॉलिसी लागू की है उसके रिजल्ट आएंगे अगर उस पर भरोसा है तो ये सब करने की जरूरत नहीं है। बॉलीवुड के चर्चित एक्टर पीयूष मिश्रा ने तमिल फिल्म 'मर्सल' में जीएसटी को लेकर एक सीन पर हुए विवाद पर यह बातें पत्रिका प्लस से हुई विशेष बातचीत में शेयर की।

पीयूष यहां मप्र नाट्य विद्यालय में शुरू हुई एक्टिंग वर्कशॉप में बतौर मेंटर आए हैं।

उन्होंने कहा कि ये तो बहुत छोटी सी बात है कि फिल्म से सीन काटने पड़े। गुलाल मूवी में भी बड़े-बड़े सींस काटे गए, उस समय तो कांग्रेस का राज था। इसका मतलब यह है कि कोई भी बंदा (राजनैतिक पार्टी) सच्चा नहीं है।

मिमिक्री हो तो इस बात पर उन्हें गुरूर होना चाहिए :
हाल ही में राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी की मिमिक्री करने वाले कलाकार श्याम रंगीला के एपिसोड को टेलीकास्ट नहीं किए जाने के मामले में पीयूष इसमें मेकर्स की गलती मानते हैं। उनका कहना है कि किसी की मिमिक्री तब ही होती है जब वो व्यक्ति इतना पॉपुलर हो, उन्हें तो अपनी प्रसिद्धि पर गुरूर होना चाहिए। पिछले 35 सालों में सबसे अधिक मिमिक्री अमिताभ ब'चन जी की हुई है लेकिन उन्होंने कभी ऑब्जेक्ट नहीं किया। मेरा मानना है कि मिमिक्री जैसी छोटी-मोटी बातों पर तो ध्यान भी नहीं दिया जाना चाहिए।

हमारा काम बनाना, उनका काम काटना :
पीयूष की कई मूवीज पर सेंसर बोर्ड ने कैंची चलाई है, इस पर पीयूष का कहना है कि हमें सिर्फ अपना काम करते रहना चाहिए और उन्हेें अपना करने देना चाहिए। हमारा काम है बनाना और उनका काम है काटना। हमें फिल्में बनाते रहना चाहिए और उस पर चलने वाली कैंची का डर नहीं होना चाहिए। पीयूष ने बताया कि इन दिनों मैं नाटक, नॉवेल और पोएट्री के कलेक्शन पर काम कर रहा हूं। जल्द ही मेरी दो कैनेडियन फिल्में 'पालकी' और 'जेल 50' आएंगी। इसके अलावा मैं 'हैप्पी भाग जाएगीÓ की फ्रैंचाइजी का भी शूट करने जा रहा हूं।