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अमेरिका में 2 लाख प्रवासी ट्रक ड्राइवरों के लाइसेंस होंगे निरस्त

अमेरिका में 2 लाख प्रवासी ट्रक ड्राइवरों के लाइसेंस निरस्त होंगे। क्या है पूरा मामला? आइए जानते हैं।

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Mar 19, 2026
Immigrant truck drivers in US

अमेरिका (United States Of America) में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के प्रशासन के एक नए कड़े नियम ने देश की सप्लाई चेन और परिवहन क्षेत्र में खलबली मचा दी है। सोमवार से लागू हुए परिवहन विभाग के इस नियम के तहत लगभग 2 लाख प्रवासी ट्रक ड्राइवरों के कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस उनकी समाप्ति तिथि के बाद रिन्यू नहीं किए जाएंगे। नए नियम के अंतर्गत अस्थाई निवास पात्रता वाले ड्राइवरों के लाइसेंस रिन्यू नहीं किए जाएंगे। यह नीति मुख्य रूप से उन प्रवासियों को प्रभावित करेगी जो शरण चाहने वाले, शरणार्थी और 'डाका' (बच्चे के रूप में अमेरिका पहुंचने के कारण कार्रवाई टली) कार्यक्रम के लाभार्थी हैं। हालांकि ये ड्राइवर कानूनी रूप से काम करने के लिए अधिकृत हैं, लेकिन अब नहीं होंगे।

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किस वजह से लिया गया फैसला?

ट्रंप प्रशासन ने यह फैसला अमेरिका में प्रवासी ट्रक ड्राइवरों के एक्सीडेंट्स के मामलों और प्रवासी ट्रक ड्राइवरों की वजह से अमेरिकी ट्रक ड्राइवरों की छिन रही नौकरियों की वजह से लिया गया है।

संघीय फंड रोकने की दी धमकी

ट्रंप प्रशासन ने जैसे कैलिफोर्निया (California) और न्यूयॉर्क (New York) जैसे राज्यों को मिलने वाली संघीय फंड रोकने की धमकी दी है जो इन नियमों का पालन नहीं करेंगे। दूसरी ओर कई प्रवासी समूहों और ट्रक यूनियनों ने इस भेदभावपूर्ण नीति के खिलाफ कानूनी मोर्चा खोल दिया है।

अमेरिकी ड्राइवरों का वेतन हो रहा है प्रभावित

परिवहन मंत्री शॉन डफी (Sean Duffy) ने इस फैसले को सड़क सुरक्षा के लिए अनिवार्य बताया है। उन्होंने कहा कि विदेशी ड्राइवर लंबे समय से लाइसेंसिंग सिस्टम का दुरुपयोग कर रहे थे, जिससे दुर्घटनाएं बढ़ी हैं। सरकार का यह भी तर्क है कि इन ड्राइवरों के पिछले रिकॉर्ड की पूरी जांच नहीं हो पाती और इनके कारण अमेरिकी ड्राइवरों के वेतन और कामकाज की स्थितियों पर बुरा असर पड़ा है।

आर्थिक संकट की आशंका

अमेरिकी अर्थव्यवस्था (US Economy) में ट्रकों की भूमिका बेहद अहम है, जो देश का 70% माल (खाद्यान्न, मशीनरी और खतरनाक सामग्री) ट्रांसपोर्ट करते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान (Iran) के साथ युद्ध के कारण बढ़ती ऊर्जा कीमतों और पहले से ही ड्राइवरों की कमी झेल रहे उद्योग के लिए यह फैसला घातक साबित होगा। इससे परिवहन लागत बढ़ेगी जिसका सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा। ऐसे में देश में महंगाई बढ़ सकती है जो सामान्य लोगों के लिए एक बड़ा झटका होगा।

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