
ईरान की इस्लामिक रिवोल्युशनरी गार्ड कॉर्प्स । ( फोटो: द वॉशिंगटन पोस्ट)
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिका को सख्त लहजे में चेतावनी दी है। आईआरजीसी ने कहा कि
अगर अमेरिका ने हॉर्मुज के जलडमरूमध्य में ईरानी तेल टैंकरों या व्यापारिक जहाजों पर कोई हमला किया तो इलाके में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और युद्धपोतों पर भारी हमला होगा।
IRGC ने कहा कि हमारे सभी मिसाइल और ड्रोन पहले से ही अमेरिकी टारगेट पर लॉक हैं। बस फायरिंग का ऑर्डर मिलने की देर है। यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब हॉर्मुज में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। दुनिया का बड़ा हिस्सा इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल पर निर्भर है, इसलिए एकबार फिर जंग के बादल मंडराने लगे हैं।
शनिवार को IRGC नेवी कमांड ने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा कि अगर ईरान के तेल टैंकरों या व्यापारिक जहाजों पर कोई आक्रामकता हुई तो इलाके में अमेरिकी केंद्रों और दुश्मन के जहाजों पर भारी हमला होगा। IRGC एयरोस्पेस फोर्स ने अलग पोस्ट में और भी सख्त लहजे में लिखा कि हमारे मिसाइल और ड्रोन अमेरिकी टारगेट्स और दुश्मन के आक्रामक जहाजों पर लॉक हो चुके हैं। हम फायरिंग के आदेश का इंतजार कर रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को ट्रूथ सोशल पर लिखा कि तीन अमेरिकी डिस्ट्रॉयर हॉर्मुज से सफलतापूर्वक गुजरे। इस दौरान ईरानी फोर्सेज ने उन पर फायरिंग की, लेकिन अमेरिकी जहाज सुरक्षित निकल गए। ट्रंप ने दावा किया है कि ईरानी नौकाओं को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया और उनके मिसाइल-ड्रोन को बीच में ही रोक लिया गया।
इधर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि अमेरिकी सेना ने गल्फ ऑफ ओमान में दो और ईरानी तेल टैंकरों को निष्क्रिय कर दिया। ये दोनों टैंकर खाली थे और ईरानी बंदरगाह की ओर जा रहे थे। USS जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश से उड़ान भरने वाले F/A-18 सुपर हॉर्नेट ने दोनों टैंकरों के स्मोकस्टैक में सटीक हमला किया। इससे पहले 6 मई को भी एक और ईरानी टैंकर M/T हसना को रोका गया था। अप्रैल 13 से अब तक अमेरिका ने कुल चार ईरानी जहाजों को निष्क्रिय किया है और 58 व्यापारिक जहाजों को दूसरी दिशा में मोड़ दिया है।
हॉर्मुज दुनिया के तेल व्यापार का गला है। यहां से रोजाना लाखों बैरल तेल गुजरता है। अगर यहां युद्ध हुआ तो पूरी दुनिया के तेल के दाम आसमान छू सकते हैं और सप्लाई चेन बिगड़ सकती है। ईरान लंबे समय से कहता रहा है कि अगर उस पर दबाव बढ़ाया गया तो वह इस जलडमरूमध्य को बंद कर सकता है।
वहीं, अमेरिका का कहना है कि वह ईरानी बंदरगाहों पर ब्लॉकेड बनाए रखेगा, जबकि ईरान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मान रहा है। सामरिक मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच सीधा टकराव टाला जाना चाहिए, वरना इसका असर न सिर्फ खाड़ी देशों पर बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। फिलहाल दोनों तरफ से बयानबाजी जारी है और नजरें हॉर्मुज की ओर टिकी हुई हैं।
Published on:
10 May 2026 07:15 am
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