विदेश

किसी वक्त लागू हो सकता है 500 प्रतिशत टैरिफ, भारत के खिलाफ ट्रंप ने ले लिया एक और बड़ा फैसला

यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रियायती रूसी कच्चे तेल की खरीद तेजी से बढ़ाई है। एक समय रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया था...

2 min read
Jan 08, 2026
ट्रंप ने 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने वाले विधेयक को दी मंजूरी (Photo-IANS)

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और चीन के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है। अमेरिका ने रूस के खिलाफ प्रतिबंधों से जुड़े एक बिल को मंजूरी दे दी है। इसके मुताबिक रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस विधेयक को हरी झंडी देने के संकेत के बाद भारत और चीन सीधे वॉशिंगटन के निशाने पर आ गए हैं।

ये भी पढ़ें

ट्रंप ने फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों को लेकर किया बड़ा दावा, कहा- डोनाल्ड प्लीज…

क्या बोले सीनेटर ग्राहम? 

रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा है कि उन्होंने बुधवार को व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात की, जहां ट्रंप ने लंबे समय से लंबित रूस प्रतिबंध विधेयक को मंजूरी दे दी। ग्राहम के मुताबिक यह बिल अगले हफ्ते ही सीनेट में वोटिंग के लिए आ सकता है, हालांकि इसके पारित होने को लेकर अभी अनिश्चितता बनी हुई है।

ग्राहम ने बयान में कहा, “यह सही समय पर लाया गया कदम है। यूक्रेन शांति के लिए रियायतें दे रहा है, जबकि पुतिन सिर्फ बातें कर रहे हैं और निर्दोष लोगों की हत्या जारी है।”

क्या है ‘Sanctioning Russia Act of 2025’

यह विधेयक रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल की अगुवाई में लाया गया है। इसमें प्रावधान है कि अगर रूस यूक्रेन के साथ शांति वार्ता से इनकार करता है, किसी समझौते का उल्लंघन करता है, नया हमला करता है या यूक्रेन की सरकार को अस्थिर करने की कोशिश करता है, तो अमेरिका सख्त कदम उठाएगा।

बिल में क्या कहा गया है?

  • रूसी राष्ट्रपति, शीर्ष सैन्य अधिकारियों और रूस को हथियार सप्लाई करने वालों पर वीजा बैन और संपत्ति फ्रीज
  • रूस से अमेरिका आने वाले सभी सामान और सेवाओं पर कम से कम 500% टैरिफ
  • रूसी तेल, गैस और यूरेनियम का व्यापार करने वाले देशों के उत्पादों पर भी 500% तक शुल्क
  • रूसी सरकारी बैंकों और उनसे लेनदेन करने वाली विदेशी वित्तीय संस्थाओं पर प्रतिबंध
  • अमेरिका से रूस को ऊर्जा और ऊर्जा-संबंधित उत्पादों के निर्यात पर रोक

भारत के लिए क्यों अहम है यह बिल

यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रियायती रूसी कच्चे तेल की खरीद तेजी से बढ़ाई है। एक समय रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया था और भारत के कुल कच्चे तेल आयात में उसकी हिस्सेदारी 35–40% तक पहुंच गई थी, जो युद्ध से पहले महज 0.2% थी।

डोनाल्ड ट्रंप भारत के रूसी तेल आयात की लगातार आलोचना करते रहे हैं। अगस्त में उनकी सरकार ने भारतीय उत्पादों पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगाया था, जिससे कुल अमेरिकी टैरिफ बढ़कर 50% हो गया — जो किसी भी बड़े व्यापारिक साझेदार पर सबसे ज्यादा में से एक है।

भारत का कहना है कि रूसी तेल आयात ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू बाजार में कीमतों को काबू में रखने के लिए जरूरी है। नई दिल्ली ने साफ किया है कि यह फैसला राष्ट्रीय हितों के आधार पर लिया गया है।

भारत-अमेरिका रिश्तों पर असर

अगर अमेरिका इस बिल के तहत सेकेंडरी प्रतिबंध लागू करता है, तो भारत के निर्यातकों पर बड़ा असर पड़ सकता है। अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात पर 500% तक टैरिफ लगने की आशंका है, जिससे फार्मा, आईटी और टेक्सटाइल जैसे सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत-अमेरिका संबंधों में और तनाव आ सकता है। हाल के वर्षों में रक्षा, रणनीतिक साझेदारी और व्यापार में रिश्ते मजबूत हुए हैं, लेकिन 2025 में व्यापार विवाद, इमिग्रेशन पाबंदियां और भू-राजनीतिक तनावों ने इन संबंधों को चुनौती दी है।

ये भी पढ़ें

निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी से इस कंपनी को बड़ा लाभ, ट्रैक सूट हुआ वायरल; जानें क्या है कीमत

Also Read
View All

अगली खबर