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पाकिस्तान को अमेरिकी मदद पर अल-सैयद का सवाल, बोले- अंतर्राष्ट्रीय कानून तोड़ने वालों को क्यों मिले अमेरिकी पैसा?

अमेरिकी सीनेटर अब्दुल अल-सैयद ने पाकिस्तान, मिस्र, जॉर्डन और इजरायल को दी जाने वाली अमेरिकी आर्थिक और सैन्य सहायता की समीक्षा की मांग की है। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के आरोपों के बीच अमेरिकी टैक्सपेयर्स के पैसे और हथियारों के इस्तेमाल पर सवाल उठाए।
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Updated: 8 Nov 2026, 6:27 PM IST
Abdul El-Sayed Election Victory
पाकिस्तान को अमेरिकी मदद पर अल-सैयद का सवाल (Photo-X @GlobeEyeNews)

अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर अब्दुल अल-सैयद ने पाकिस्तान, मिस्र, जॉर्डन और इजरायल को दी जाने वाली अमेरिकी आर्थिक और सैन्य सहायता पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में टैक्स देने वाले लोगों के पैसे का इस्तेमाल उन देशों की मदद के लिए नहीं होना चाहिए, जिन पर अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन के आरोप हैं।

सीनेटर अब्दुल अल-सैयद ने क्या कहा? 

ABC को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अमेरिका को सबसे पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके अपने फैसले और कार्रवाइयां अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुरूप हों। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे को केवल इजरायल तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम खुद अंतर्राष्ट्रीय कानून के प्रति जवाबदेह रहें। यह सिर्फ इजरायल की बात नहीं है। मैं मिस्र के मामले में भी यही रुख रखता हूं, जहां से मेरा परिवार अमेरिका आया था। पाकिस्तान और जॉर्डन के मामले में भी मेरा यही दृष्टिकोण है।

उन्होंने आगे कहा कि यदि अमेरिका किसी ऐसे देश को आर्थिक या सैन्य सहायता देता है, जो उसी पैसे का इस्तेमाल अंतर्राष्ट्रीय कानून के उल्लंघन में करता है, तो इस पर सबसे पहले विचार किया जाना चाहिए।

इजरायल को सैन्य सहायता घटाने के ट्रंप के प्रस्ताव का समर्थन

बता दें कि सीनेटर सैयद का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सालाना करीब 4 अरब डॉलर की इजरायली सैन्य सहायता बंद करने की योजना की घोषणा की है।

ट्रंप के इस प्रस्ताप का सैयद ने समर्थन किया है। सीनेटर ने कहा कि इस मामले में राष्ट्रपति की नीति सही दिशा में है। इसके अलावा उन्होंने इजरायल को अमेरिकी हथियारों की बिक्री पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग की। उनका आरोप है कि अमेरिका से मिलने वाले कुछ हथियारों का इस्तेमाल ऐसे अभियानों में किया जा रहा है, जिन्हें वह नरसंहार और रंगभेद जैसी गंभीर गतिविधियों से जोड़ते हैं।

पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय मदद पर भारत ने जताई थी आपत्ति

बता दें कि भारत लंबे समय से आशंका जताता रहा है कि पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से मिलने वाली सहायता का इस्तेमाल आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों या सैन्य उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।

भारत का कहना है कि किसी भी देश को मिलने वाली आर्थिक मदद का इस्तेमाल सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने या अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के सामने किए गए सुधार संबंधी वादों को पूरा करने में विफल रहने के बावजूद लाभ उठाने के लिए नहीं होना चाहिए।

भारत ने विश्व बैंक से पाकिस्तान को अतिरिक्त वित्तीय सहायता दिए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। इसके पीछे आतंकवाद के वित्तपोषण और फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के अनुपालन रिकॉर्ड से जुड़ी चिंताएं रही हैं।

भारत ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के उस फैसले के समर्थन में मतदान नहीं किया था, जिसके तहत पाकिस्तान को 1 अरब डॉलर की राशि जारी की जानी थी। हालांकि, भारत की आपत्तियों के बावजूद IMF ने समीक्षा को मंजूरी देते हुए पाकिस्तान के लिए यह राशि जारी कर दी।

Updated on:
8 Nov 2026, 6:27 PM IST
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