
Taliban-Pakistan clash: अंतरराष्ट्रीय मानवीय राहत एजेंसी नॉर्वेजियन रिफ्यूजी काउंसिल (NRC) की रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान में तालिबान और पाकिस्तान के बीच जारी संघर्ष के चलते 1,15,000 से अधिक लोग अपने घर छोड़ने पर मजबूर हुए हैं। NRC के अफगानिस्तान निदेशक जैकोपो कैरीडी ने कहा कि कई परिवारों के लिए अपनी जिंदगी खतरे में थी, इसलिए उन्हें तत्काल अपने घर छोड़ने पड़े। अब ये लोग अस्थायी कैंपों या स्थानीय परिवारों पर निर्भर हैं, जबकि कई को कम गुणवत्ता वाले मकानों में रहना पड़ रहा है। घर का खर्च उठाना उनके लिए मुश्किल हो रहा है, और उन्हें साफ पानी, स्वास्थ्य सेवाओं और बच्चों की शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसी ने 16 मार्च को काबुल में ड्रग रिहैबिलिटेशन अस्पताल पर पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक का भी जिक्र किया। एजेंसी के अनुसार, शहरी इलाकों में इस तरह के हमलों में वृद्धि यह संकेत देती है कि संघर्ष अब और तेज हो रहा है।
NRC ने कहा कि अब तक लगभग 800 घरों को नुकसान पहुंच चुका है, और परिवारों के लिए इस नुकसान से उबरना सालों तक मुश्किल हो सकता है। कैरीडी ने जोर देकर कहा, 'संघर्ष में शामिल सभी पक्षों को अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करना चाहिए। आम नागरिकों और उनकी बुनियादी सुविधाओं को कभी भी निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।'
65 वर्षीय अफगान नागरिक 'बख्तियार' ने बताया कि भारी गोलाबारी के बाद उन्हें अपने छह बच्चों के साथ 'पाकिस्तान सीमा के पास तोरखम' में घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कहा, 'रात लगभग 10 बजे हम अचानक रॉकेट और गोलियों की आवाज सुनने लगे। कुछ ही मिनटों में हमला इतना तेज हो गया कि हमारे पास भागने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।'
एजेंसी ने चेतावनी दी कि मानवीय सहायता के लिए फंडिंग में कटौती का असर अफगानिस्तान पर बहुत बुरा पड़ रहा है। दुनिया में अफगानिस्तान सबसे कम वित्तपोषित मानवीय मदद वाला देश बन गया है। लड़ाई की वजह से अब जो थोड़ी मदद उपलब्ध थी, वह भी नहीं पहुंच पा रही।
कैरीडी ने कहा, 'दुनिया में उथल-पुथल के बीच, अफगानों की चिंता जरूरी है। बढ़ती खाद्य कीमतें और बंद बॉर्डर उन परिवारों के लिए मुश्किलें और बढ़ा रहे हैं, जिनकी जिंदगी पहले ही संघर्ष से बर्बाद हो चुकी है।'
अफगानिस्तान ने 21 फरवरी को पाकिस्तानी कार्रवाई के जवाब में 27 फरवरी को पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई शुरू की थी। इसके बाद, सऊदी अरब, कतर और तुर्की जैसे मध्यस्थ देशों की सिफारिश पर अफगानिस्तान ने ईद के मौके पर अपने ‘राद अल-ज़ुल्म’ ऑपरेशन को रोकने का निर्णय लिया। पाकिस्तान ने भी ईद के लिए सैन्य कार्रवाई में कुछ समय के लिए रोक की घोषणा की। सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने बताया कि यह निर्णय मध्यस्थ देशों की सलाह पर लिया गया।
हालांकि अफगान अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान ने सीजफायर का पालन नहीं किया। अफगान सेना प्रमुख फसीहुद्दीन फितरत ने दावा किया कि पाकिस्तानी सेना ने डूरंड लाइन के पास सीजफायर नियमों का उल्लंघन किया। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, सीमा क्षेत्र में पाकिस्तानी हमलों में कई लोग मारे गए। फितरत ने कहा कि लगातार हमले पाकिस्तान की 'कमिटमेंट की कमी और धोखे' को दर्शाते हैं।