वेनेज़ुएला और ईरान के बाद डोनाल्ड ट्रंप अब क्यूबा के पीछे पड़े हुए हैं। आखिर क्या चाहते हैं अमेरिकी राष्ट्रपति? आइए नज़र डालते हैं।
वेनेज़ुएला (Venezuela) के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो (Nicolás Maduro) को बंधक बनाने और वहाँ सत्ता परिवर्तन के बाद अमेरिका (United States Of America) के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान (Iran) पर हमला कर दिया। अभी भी ईरान पर अमेरिकी हमलों का सिलसिला थमा नहीं है, जिसके जवाब में ईरान भी इज़रायल (Israel) और अमेरिका के सहयोगी मिडिल ईस्ट देशों पर लगातार हमले कर रहा है। अब ट्रंप की नज़र कैरेबियाई देश क्यूबा (Cuba) पर है।
ट्रंप पिछले दो महीने में अलग-अलग मौकों पर क्यूबा पर कब्ज़े की बात कर चुके हैं। हालांकि उनकी इस बात का काफी विरोध भी हुआ है। गौरतलब है कि क्यूबा से अमेरिका की पुरानी रंजिश रही है। क्यूबा से अमेरिका के तनाव की शुरुआत 1959 से हुई थी जब वहाँ शीतयुद्ध के समय क्यूबाई क्रांति होने से अमेरिका समर्थित सत्ता पलट दी गई थी। फिदेल कास्त्रो (Fidel Castro) की अगुवाई में क्यूबा की नज़दीकी तत्कालीन सोवियत यूनियन से बढ़ी। कास्त्रों ने तब क्यूबा में मौजूद अमेरिकी और ब्रिटिश रिफाइनरियों का राष्ट्रीयकरण कर दिया। अमेरिका ने सीआइए के ज़रिए क्यूबा में तख्तापलट के कई प्रयास किए लेकिन सफल नहीं हो सके। इस दौरान लगातार क्यूबा पर प्रतिबंध लगे रहे। शीतयुद्ध के बाद 2014 में दोनों देशों के संबंधों में कुछ सुधार आया, लेकिन ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद समुद्री घेराबंदी और प्रतिबंध और कड़े हो गए।
ट्रंप क्यूबा की सत्ता में बदलाव चाहते हैं। ट्रंप चाहते हैं कि क्यूबा के राष्ट्रपति मिगेल डियाज़ कनेल बरमुडेज़ (Miguel Díaz-Canel Bermúdez) अपना पद छोड़ दें। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो (Marco Rubio) क्यूबा मूल के ही हैं और इस मामले को देख भी रहे हैं। वह भी क्यूबा की समाजवादी राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव चाहते हैं। ट्रंप प्रशासन की मांग है कि क्यूबा राजनीतिक और आर्थिक उदारीकरण की दिशा में बढ़े।
महीनों से अमेरिकी घेरेबंदी में फंसे क्यूबा की आर्थिक स्थिति पहले ही खराब थी। अब वहाँ आमजीवन भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। बीते तीन महीनों से क्यूबा में ईंधन का कोई बड़ा शिपमेंट नहीं पहुंचा है। सत्ता-परिवर्तन से पहले वेनेज़ुएला से ही सबसे ज्यादा ईंधन की आपूर्ति क्यूबा को होती थी। ईधन की किल्लत के कारण देश की परिवहन व्यवस्था चरमरा गई है। चिकित्सा सेवाओं पर भी बेहद नकारात्मक असर पड़ा है। बिजली गुल होना अब क्यूबा में बेहद आम बात हो गई है। ट्रंप की ज़िद की वजह से क्यूबा में हालात बिगड़ रहे हैं।