
एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI - Artificial Intelligence) का इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ रहा है। कई सेक्टर्स में एआई अब अहम हिस्सा बन गया है। अब ब्रिटेन (Britain) में एआई का एक अलग अंदाज़ में इस्तेमाल की तैयारी है। जेलों की सुरक्षा और कैदियों की निगरानी के लिए भविष्य में एआई को मैदान में उतारा जा सकता है। पिछले साल ब्रिटेन के जेल मंत्री लॉर्ड टिम्पसन के साथ हुई एक विशेष बैठक में कई बड़ी टेक कंपनियों के प्रतिनिधियों ने ये सुझाव दिए थे।
इस बैठक में एमेज़ॉन, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी दिग्गज कंपनियों के प्रतिनिधि भी थीं। आपराधिक गतिविधियों पर नजर रखने के लिए त्वचा में माइक्रोचिप लगाने का विचार भी रखा गया। कंपनियों का कहना है कि एआई की मदद से यह अनुमान लगाने में मदद मिल सकती है कि कौनसे अपराधी भविष्य में क्या और कितना खतरा पैदा कर सकते हैं। आलोचक इसे बेहद चिंताजनक और डरावना बता रहे हैं।
चर्चा के दौरान जेलों में कैदियों की आवाजाही के लिए रोबोट्स के इस्तेमाल की भी बात हुई। कैदियों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए सेल्फ-ड्राइविंग वाहनों का उपयोग और एआई के जरिए किसी व्यक्ति से भविष्य में संभावित खतरे का आकलन करने जैसी बातों पर जोर दिया गया। हालांकि ब्रिटिश सरकार ने अभी किसी प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है और इस बारे में सिर्फ चर्चा ही चल रही है।
बैठक पिछले साल हुई थी, लेकिन इसकी जानकारी अब बाहर आई है। जानकारी सार्वजनिक करने में फॉक्सग्लोव संगठन की अहम भूमिका रही। यह संगठन सरकारों और कंपनियों द्वारा तकनीक के दुरुपयोग को उजागर करने के लिए जाना जाता है। इसने सूचना के अधिकार के तहत आवेदन देकर बैठक में हुई चर्चाओं का विवरण हासिल किया।
मानवाधिकार और निजता के समर्थकों का मानना है कि अगर भविष्य में ऐसी तकनीकों को लागू किया जाता है तो इससे व्यक्तिगत स्वतंत्रता, गोपनीयता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं। वहीं समर्थकों का तर्क है कि जेलों में बढ़ती भीड़, अपराध की रोकथाम और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल अहम भूमिका निभा सकता है।