मशहूर अमेरिकी रॉक क्लाइंबर एलेक्स होनोल्ड ने ताइवान की 508 मीटर ऊंची 'ताइपे 101' इमारत पर बिना किसी सुरक्षा रस्सी के चढ़कर इतिहास रच दिया है। जानें कैसे मात्र 91 मिनट में उन्होंने इस खतरनाक चुनौती को पूरा किया।
दुनिया के सबसे साहसी और खतरनाक फ्री-सोलो रॉक क्लाइंबर माने जाने वाले अमेरिकी एथलीट एलेक्स होनोल्ड ने ताइवान में एक ऐतिहासिक कारनामा कर दिखाया है। होनोल्ड ने राजधानी ताइपे की पहचान और 508 मीटर ऊंची गगनचुंबी इमारत ‘ताइपे 101’ पर बिना किसी यांत्रिक सहायता या हार्नेस के सफल चढ़ाई पूरी की। इस चुनौतीपूर्ण चढ़ाई को उन्होंने करीब 90–91 मिनट में अंजाम दिया।
एलेक्स होनोल्ड ने इमारत की बाहरी संरचना पर मौजूद धातु की बीमों, खांचों और पकड़ वाली सतहों का सहारा लेते हुए यह चढ़ाई की। पूरी चढ़ाई के दौरान उन्होंने किसी भी प्रकार के सुरक्षा उपकरण का इस्तेमाल नहीं किया। तेज हवा और फिसलन भरी सतह के बीच, केवल शारीरिक संतुलन और मानसिक दृढ़ता के बल पर उन्होंने 508 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचकर इतिहास रच दिया। चढ़ाई पूरी करने के बाद होनोल्ड ने इसे “अद्भुत और अविस्मरणीय अनुभव” बताया।
गौरतलब है कि ताइपे 101 वर्ष 2004 से 2010 तक दुनिया की सबसे ऊंची इमारत रही थी। अब यह खिताब दुबई की बुर्ज खलीफा के पास है, लेकिन अपनी अनोखी बनावट और ऊंचाई के कारण ताइपे 101 पर्वतारोहियों के लिए हमेशा एक बड़ी चुनौती रही है। इससे पहले वर्ष 2004 में फ्रांस के प्रसिद्ध क्लाइंबर एलेन रॉबर्ट (फ्रेंच स्पाइडरमैन) ने इस इमारत पर चढ़ाई की थी, हालांकि वह फ्री-सोलो नहीं थी।
कैलिफोर्निया के रहने वाले 40 वर्षीय एलेक्स होनोल्ड फ्री-सोलो क्लाइम्बिंग की दुनिया के सबसे बड़े नामों में शामिल हैं। इससे पहले उन्होंने अमेरिका के योसेमाइट नेशनल पार्क में स्थित करीब 3,000 फीट ऊंची एल कैपिटन चट्टान पर बिना रस्सी चढ़ाई कर दुनिया भर में पहचान बनाई थी। इस उपलब्धि पर बनी ‘फ्री सोलो’ नामक डॉक्यूमेंट्री को ऑस्कर पुरस्कार भी मिल चुका है। ताइपे 101 पर की गई यह चढ़ाई उनके करियर की सबसे साहसी और चर्चित उपलब्धियों में से एक मानी जा रही है।