विदेश

‘America First’ या ‘Israel First’? ईरान ने इस्लामाबाद वार्ता से पहले रख दी खुली शर्त, डील या जंग तय होगी आज

वार्ता की मेज पर बैठने से पहले ही ईरान ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया। उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरेफ ने एक्स पर लिखा कि इस्लामाबाद में अगर ‘अमेरिका फर्स्ट’ वाले प्रतिनिधि आए तो समझौता संभव है, लेकिन ‘इजराइल फर्स्ट’ वाले आए तो कोई डील नहीं होगी और युद्ध और भी ताकत से जारी रहेगा।

2 min read
Apr 11, 2026
प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (फोटो- AI)

युद्ध को लेकर बातचीत की मेज पर बैठने से पहले ही ईरान ने अपना पत्ता खोल दिया है। ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरेफ ने एक्स पोस्ट में लिखा कि अगर इस्लामाबाद में हमारा सामना 'अमेरिका फर्स्ट' वाले नुमाइंदों से हुआ तो समझौता मुमकिन है। लेकिन अगर सामने 'इजराइल फर्स्ट' वाले आए तो कोई डील नहीं होगी और जंग पहले से कहीं ज्यादा ताकत के साथ जारी रहेगी। यह सिर्फ एक बयान नहीं था। यह ईरान का अमेरिका को सीधा संदेश था कि इजराइल के इशारे पर चले तो घर खाली हाथ जाओगे।

ये भी पढ़ें

ईरान से बातचीत के लिए पाकिस्तान को रवाना हुए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, जाने से पहले दे डाली चेतावनी

आधी रात, लड़ाकू विमानों का घेरा और खामोशी

ईरानी प्रतिनिधिमंडल आधी रात के बाद इस्लामाबाद पहुंचा। लेकिन जो नजारा था वो किसी फिल्म से कम नहीं था। जैसे ही ईरानी विमान ने पाकिस्तानी हवाई सीमा में कदम रखा, पाकिस्तान की वायुसेना हरकत में आ गई।

AWACS यानी हवाई चेतावनी विमान, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध विमान और लड़ाकू जेट चारों तरफ से उसकी सुरक्षा में तैनात हो गए। इतनी सुरक्षा किसी राष्ट्राध्यक्ष को भी कम ही मिलती है।

ईरानी दल की अगुवाई संसद स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ कर रहे हैं जो जंग के पूरे दौर में तेहरान की रणनीति के केंद्र में रहे हैं।

अमेरिकी टीम में ट्रंप का परिवार भी शामिल

उधर अमेरिकी दल भी कमजोर नहीं है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर भी इस्लामाबाद पहुंचे हैं।

शनिवार की सुबह ईरानी दल अपने आवास से निकला और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कार्यालय पहुंचा जहां शहबाज शरीफ से मुलाकात के बाद औपचारिक बातचीत शुरू हुई। मुंबई स्थित ईरानी कॉन्सुलेट जनरल ने एक्स पर इसकी पुष्टि भी की।

शहबाज बोले- यह 'करो या मरो' की घड़ी

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस बैठक को 'मेक ऑर ब्रेक' यानी अब नहीं तो कभी नहीं वाली बातचीत बताया है। 8 अप्रैल को सीजफायर का ऐलान हुआ था और तब से पूरी दुनिया इस्लामाबाद की तरफ देख रही थी। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने साफ कहा है कि इस बातचीत के लिए सिर्फ 15 दिन का वक्त है।

अगले 48 घंटे दुनिया के सबसे अहम घंटे

एक तरफ वेंस पहले ही कह चुके हैं कि अगर ईरान ने चालाकी दिखाई तो अमेरिकी टीम सुनने वाली नहीं है। दूसरी तरफ ईरान ने भी साफ कर दिया है कि इजराइल का दबाव दिखा तो वो उठकर चले जाएंगे।

बीच में बैठा है पाकिस्तान जो खुद को शांतिदूत साबित करने की पूरी कोशिश में है। इस्लामाबाद में अगले 48 घंटे तय करेंगे कि एक महीने से ज्यादा से जल रहा मध्य पूर्व ठंडा होगा या आग और भड़केगी। दुनिया सांस रोककर देख रही है।

ये भी पढ़ें

आर-पार की तैयारी में इजराइल, लेबनान में एम्बुलेंस को भी बनाएगा निशाना, वजह भी बताई
Also Read
View All