
Armenia Azerbaijan Peace Deal: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच शांति की दिशा में हुई प्रगति को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ की है। रुबियो ने ट्रंप को 'प्रेसिडेंट ऑफ पीस' बताया है। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने दोनों देशों के बीच दशकों से चले आ रहे संघर्ष को खत्म करने की दिशा में अहम भूमिका निभाई। रुबियो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पिछले साल हुई अहम बैठक का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 8 अगस्त 2025 को ट्रंप ने व्हाइट हाउस में आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिन्यान और अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव की बैठक की मेजबानी की थी।
इस बैठक के दौरान दोनों देशों के नेताओं ने एक संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें शांति समझौते को आगे बढ़ाने और दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य करने की दिशा में काम करने की प्रतिबद्धता जताई गई थी। ट्रंप इस घोषणा के साक्षी बने थे। रुबियो के मुताबिक, यह कदम दक्षिण काकेशस में लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष के बाद शांति और आर्थिक सहयोग का रास्ता खोलने वाला था।
घोषणा में दोनों देशों के बीच परिवहन संपर्क बहाल करने और क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग बढ़ाने की बात भी शामिल थी। इसके जरिए लंबे समय से संघर्ष वाले क्षेत्र में व्यापार और संपर्क को बढ़ावा देने की कोशिश की गई।
मार्को रुबियो ने ट्रंप रूट फॉर इंटरनेशनल पीस एंड प्रॉस्पेरिटी (टीआरआईपीपी) का भी जिक्र किया। संयुक्त घोषणा के मुताबिक आर्मेनिया अमेरिका और अन्य तय पक्षों के साथ मिलकर अपने क्षेत्र में इस कनेक्टिविटी परियोजना का ढांचा तैयार करेगा। इस परियोजना का उद्देश्य दक्षिण काकेशस में परिवहन और व्यापार संपर्क को मजबूत करना है। इसके तहत रेल, सड़क, ऊर्जा और डिजिटल बुनियादी ढांचे के विकास की योजना है।
रुबियो ने कहा कि पिछले एक साल में अमेरिका ने आर्मेनिया और अजरबैजान के साथ मिलकर समझौते को आगे बढ़ाने पर काम किया है। आर्मेनिया में रेलवे से जुड़े इंजीनियरिंग सर्वेक्षण शुरू हो चुके हैं। वहीं, अजरबैजान की तरफ से आर्मेनिया को जोड़ने वाली सड़क और रेलवे परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है।
अमेरिकी विदेश मंत्री के मुताबिक, इन प्रयासों का उद्देश्य केवल दोनों देशों के बीच शांति को मजबूत करना नहीं है, बल्कि दक्षिण काकेशस में संपर्क और आर्थिक सहयोग को भी बढ़ावा देना है।
रुबियो ने कहा कि पिछले साल वॉशिंगटन में हुई बैठक के बाद दोनों देशों के बीच शांति और क्षेत्रीय सहयोग की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता तैयार हुआ है।