
ऑस्ट्रेलिया (Australia) ने कुछ समय पहले ही एक ऐसा फैसला लिया था जिससे रूस (Russia) की नाराज़गी बढ़ गई थी। दरअसल रूस अपने नए दूतावास का ऑस्ट्रेलिया में निर्माण करा रहा था और इसके लिए उसने ऑस्ट्रेलिया के संसद भवन के पास जगह चुनी थी। ऑस्ट्रेलियाई संसद के पास स्थित यह ज़मीन रूस के पास लीज़ पर थी और उसने इस पर अपने नए दूतावास का निर्माण कराने का फैसला लिया था, जिसे ऑस्ट्रेलिया सरकार की तरफ से ग्रीन सिग्नल नहीं मिला था। रूस के पास यह ज़मीन 2008 से लीज़ पर थी और इस पर अपने नए दूतावास के निर्माण को ग्रीन सिग्नल नहीं मिलने पर रूस ने क़ानूनी एक्शन लेते हुए ऑस्ट्रेलिया सरकार के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। पर अब रूस को ऑस्ट्रेलियाई हाई कोर्ट ने झटका दे दिया है।
ऑस्ट्रेलियाई हाईकोर्ट ने ठुकराई रूस की अर्जी
रूस ने ऑस्ट्रेलिया की सरकार के अपने नए दूतावास के निर्माण को ग्रीन सिग्नल नहीं देने के फैसले को ऑस्ट्रेलियाई हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए इस फैसले के खिलाफ अर्जी लगाईं थी। रूस चाहता था कि उसके नए दूतावास के निर्माण कार्य को ग्रीन सिग्नल नहीं देने के ऑस्ट्रेलिया सरकार के फैसले को वापस लिया जाए और निर्माण कार्य को ग्रीन सिग्नल मिल जाए। पर ऑस्ट्रेलियाई हाईकोर्ट ने रूस को झटका देते हुए उसकी अर्जी को ठुकरा दिया है। यह फैसला हाईकोर्ट की जज जेन जैगॉट (Jayne Jagot) ने सुनाया है।
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क्या है ऑस्ट्रेलिया के रूस के दूतावास को ग्रीन सिग्नल न देने की वजह?
रूस अपने नए दूतावास का निर्माण ऑस्ट्रेलिया के संसद भवन के पास कराना चाहता है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ (Anthony Albanese) इसे सुरक्षित नहीं मानते। अल्बनीज़ इस बारे में पहले ही साफ कर चुके हैं कि देश के संसद भवन के पास रुसी दूतावास का होना देश की सुरक्षा के साथ समझौता करने जैसा है। रूस के नए दूतावास को ऑस्ट्रेलियाई संसद के पास बनने की अनुमति देने को ऑस्ट्रेलिया सरकार जोखिमपूर्ण मानती है, जिससे सरकार के खिलाफ जासूसी का खतरा बढ़ सकता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने यह फैसला लिया था।
इसके साथ ही ऑस्ट्रेलियाई सरकार लंबे समय से रूस के साथ चले आ रहे लीज़ समझौते को समाप्त करने की कोशिश भी कर रही है, जिस पर पहली बार 2008 में हस्ताक्षर किया गया था। इसके लिए जल्द ही कानून भी बनाया जा सकता है।
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