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‘भारत-अमेरिका संबंधों के पक्ष में है लॉन्ग टर्म फ्यूचर’, डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व एनएसए ने कह दी बड़ी बात

India-US Relationship: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व एनएसए ने भारत-अमेरिका संबंधों के बारे में एक बड़ी बात कह दी है।
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भारत

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Tanay Mishra

Sep 18, 2026

HR McMaster

एच. आर. मैकमास्टर (Photo - ANI)

अमेरिका (United States of America) के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के पूर्व नेशनल सिक्योरिटी एडवाइज़र (एनएसए) लेफ्टिनेंट जनरल एच. आर. मैकमास्टर (H. R. McMaster) ने भारत-अमेरिका संबंधों पर बड़ी बात कह दी है। मैकमास्टर ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा "लॉन्ग टर्म फ्यूचर भारत-अमेरिका संबंधों के पक्ष में है।" ट्रंप के पूर्व एनएसए ने इस बात पर जोर दिया कि आपसी लोकतांत्रिक मूल्यों, आर्थिक हितों और चीन को लेकर चिंताओं के कारण आपसी तनाव के बावजूद भारत (India) और अमेरिका एक-दूसरे के करीब आते रहेंगे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मैकमास्टर ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान 2017 से 2018 के दौरान उनके एनएसए रहे थे।

"रूस को नहीं चुनने या ब्रिक्स से अलग होने का दबाव नहीं डालना चाहिए"

इंटरव्यू के दौरान मैकमास्टर ने आगे कहा, "भारत को अमेरिका पर भरोसा रखना चाहिए। साथ ही अमेरिका को भी पर भारत पर रूस (Russia) और उसके बीच किसी एक पक्ष को चुनने या ब्रिक्स (BRICS) जैसे समूहों से अलग होने के लिए दबाव नहीं डालना चाहिए। मुझे लगता है कि हमें इस बारे में ज़्यादा चिंता नहीं करनी चाहिए और भरोसा रखना चाहिए कि भारत-अमेरिका संबंधों का भविष्य वास्तव में बहुत अच्छा है।"

"भारत को रखना चाहिए फ़्री-मार्केट इकोनॉमी पर भरोसा"

मैकमास्टर ने आगे कहा, "भारत को प्रतिनिधि सरकार और फ़्री-मार्केट इकोनॉमी (मुक्त बाज़ार अर्थव्यवस्था) पर भरोसा रखना चाहिए। अमेरिका, यूरोपीय संघ और जापान इसी मॉडल का प्रतिनिधित्व करते हैं। मुझे हमारी लोकतांत्रिक सरकारों और फ़्री-मार्केट इकोनॉमी सिस्टम पर पूरा भरोसा है।"

"चीन के बारे में दोनों देशों की एक जैसी सोच"

मैकमास्टर ने आगे कहा, "भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक संबंधों की नींव चीन के बारे में दोनों देशों की एक जैसी सोच पर टिकी है। मुझे लगता है कि इस बात को समझना बहुत ज़रूरी है कि चीन का रवैया दुश्मन जैसा है। चीन भारत और मेरे हिसाब से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के सभी देशों के साथ ऐसे संबंध चाहता है जिसमें वो उसके गुलाम बनकर रहें। ऐसे में चयन चीन और अमेरिका के बीच नहीं है; बल्कि गुलामी और संप्रभुता के बीच है। अमेरिका संप्रभुता के पक्ष में है।"

"अगर भारत सफल होता है, तो दुनिया भी सफल होगी"

मैकमास्टर ने आगे कहा, "अगर भारत सफल होता है, तो मेरी नज़र में दुनिया भी सफल होगी।" उन्होंने भोजन, ऊर्जा और जल सुरक्षा के मामलों में भारत को शामिल करते हुए एक बड़े अंतरराष्ट्रीय प्रयास की वकालत की। उन्होंने आगे कहा, "अगर आप बाज़ार-आधारित ऐसे समाधान विकसित कर सकते हैं जिनमें बाज़ार इन समाधानों को अपनाने के लिए प्रोत्साहन दे और वो भारत में सही से काम करते हैं, तो वो पूरी दुनिया के लिए भी सही से काम करेंगे।"