Tariq Rehman Troll: बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान को 12 फरवरी के चुनाव नतीजों में कथित हेरफेर के लिए सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल किया जा रहा है।
Bangladesh Elections : बांग्लादेश में हाल ही में संपन्न हुए चुनाव (Bangladesh Elections) में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने एकतरफा और प्रचंड जीत दर्ज की है। इस जीत के साथ ही पार्टी के प्रमुख तारिक रहमान (Tariq Rehman) देश के नए प्रधानमंत्री (Bangladesh PM) बन गए हैं। लेकिन सत्ता की कुर्सी पर बैठते ही उनके लिए परेशानियां शुरू हो गई हैं। मजे की बात यह है कि विपक्ष नहीं, बल्कि उनके अपने ही गठबंधन के सहयोगी उन पर हमलावर हो गए हैं और दुनिया भर में उनकी किरकिरी हो रही है। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें ट्रोल कर रहे हैं और उन्हें एक नया नाम दे दिया गया है-"इंजीनियर"।
दरअसल, बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11-दलीय गठबंधन ने बीएनपी और तारिक रहमान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस गठबंधन का अहम हिस्सा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) है। एनसीपी के वरिष्ठ नेता नसीरुद्दीन पटवारी ने सबसे पहले फेसबुक पर एक पोस्ट लिखकर तारिक रहमान को "इंजीनियर" कहकर तंज कसा। पटवारी वही नेता हैं, जिन्होंने कुछ समय पहले बीएनपी के दिग्गज नेता मिर्ज़ा अब्बास को "चांदाबाज़" (वसूली करने वाला) कहा था। उनका यह "इंजीनियर" वाला तंज इशारा करता है कि रहमान ने 12 फरवरी के चुनाव नतीजों को अपने पक्ष में 'इंजीनियर' (सेट या फिक्स) किया है।
एनसीपी और जमात-ए-इस्लामी के कई बड़े नेताओं ने सीधा दावा किया है कि राष्ट्रीय चुनावों में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है। उनका आरोप है कि बीएनपी ने शेख हसीना के खिलाफ हुए 'जुलाई आंदोलन' के मूल चार्टर को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया है। सहयोगी दलों का स्पष्ट कहना है कि तारिक रहमान ने जनता का असली जनादेश चुराया है और नतीजों में हेरफेर करके प्रधानमंत्री की कुर्सी हासिल की है। इस अंदरूनी कलह ने बांग्लादेश की राजनीति में एक नया भूचाल ला दिया है।
इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद बांग्लादेश के भीतर और बाहर सोशल मीडिया पर मीम्स और चुटकुलों की बाढ़ आ गई है। आम जनता और विपक्षी समर्थक तारिक रहमान के इस नए 'इंजीनियर' वाले नाम पर मजे ले रहे हैं। लोगों का कहना है कि जो सरकार चुनाव में फर्जीवाड़ा करके बनी है, वह लोकतंत्र की रक्षा कैसे करेगी। वहीं, बीएनपी के समर्थक अपने नेता का बचाव कर रहे हैं, जिससे सोशल मीडिया पर दोनों गुटों में भारी बहस छिड़ी हुई है।
यह विवाद सामने आने के बाद जमात-ए-इस्लामी गठबंधन ने सड़क पर उतर कर बड़े विरोध प्रदर्शन की सख्त चेतावनी दी है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में ढाका की सड़कों पर बीएनपी समर्थकों और जमात कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़पें हो सकती हैं। तारिक रहमान सरकार पर इस कलह को शांत करने और अपनी सत्ता को स्थिर करने का भारी दबाव आ गया है।
अंतरराष्ट्रीय और कूटनीतिक नजरिए से देखें, तो यह घटनाक्रम पूरे दक्षिण एशिया के लिए चिंता का विषय है। एक अस्थिर बांग्लादेश, जहां प्रधानमंत्री पर चुनाव फिक्स करने के आरोप लग रहे हों, भारत सहित पड़ोसी देशों की सुरक्षा और व्यापारिक हितों पर सीधा असर डाल सकता है। इसके अलावा, जमात-ए-इस्लामी जैसी कट्टरपंथी पार्टी का बीएनपी पर हावी होने का प्रयास भविष्य में बांग्लादेश की विदेश नीति को भी कट्टर दिशा में धकेल सकता है।