
Bangladesh Violence Against Women: बांग्लादेश में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर एक नई रिपोर्ट ने गंभीर चिंता पैदा कर दी है। ढाका की एक महिला अधिकार संगठन- ‘बांग्लादेश महिला परिषद’ (BMP) की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में रेप, सामूहिक दुष्कर्म, हत्या, आत्महत्या, यौन उत्पीड़न, दहेज हिंसा और बाल विवाह के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। संगठन ने इसे महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा राष्ट्रीय संकट बताया है।
रिपोर्ट के अनुसार, सामूहिक दुष्कर्म के मामलों में सबसे अधिक पीड़ित बच्चियां रहीं। रिपोर्ट में 142 गैंगरेप, 117 दुष्कर्म के प्रयास और 203 आत्महत्या के मामले बच्चियों से जुड़े दर्ज किए गए। वहीं, 6 से 9 वर्ष की आयु की बच्चियों में दुष्कर्म के सबसे अधिक मामले सामने आए, जिसे संगठन ने समाज के लिए बेहद चिंताजनक बताया।
रिपोर्ट के मुताबिक, वयस्क महिलाओं के खिलाफ हत्या के 756 मामले दर्ज किए गए, जो सबसे अधिक रहे। इसके अलावा 376 महिलाओं के साथ दुष्कर्म और 125 मामलों में यौन उत्पीड़न की घटनाएं दर्ज की गईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि बचपन में लड़कियां यौन हिंसा के सबसे अधिक खतरे में रहती हैं, जबकि उम्र बढ़ने के साथ हत्या और आत्महत्या का जोखिम बढ़ जाता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश में महिलाओं और बच्चियों के लिए न तो घर पूरी तरह सुरक्षित हैं और न ही शैक्षणिक संस्थान। पेशे के आधार पर किए गए एनालिसिस में गृहिणियां हत्या, आत्महत्या और दहेज से जुड़ी हिंसा की सबसे बड़ी शिकार पाई गईं। वहीं, छात्राओं में दुष्कर्म के प्रयास, आत्महत्या, गैंगरेप और बाल विवाह के मामले भी बड़ी संख्या में दर्ज हुए।
बांग्लादेश महिला परिषद ने कहा कि प्रभावशाली लोगों का हस्तक्षेप, जांच में देरी, कमजोर सबूत, गवाहों की कमी और पीड़ितों को ही दोषी ठहराने की सामाजिक प्रवृत्ति के कारण कई आरोपी कानून की पकड़ से बच जाते हैं। संगठन ने मौजूदा कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने, मामलों का तेजी से निपटारा करने और जवाबदेही तय करने की मांग की है।
‘बीएमपी’ की अध्यक्ष फौजिया मोसलेम ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा की कोई निश्चित उम्र नहीं होती। उनके मुताबिक, छह साल की बच्ची से लेकर 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिला तक हर आयु वर्ग की महिलाएं हिंसा के खतरे का सामना कर रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार और समाज दोनों को मिलकर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।