Ring of Fire earthquake:बेरिंग सागर में सोमवार को 6.1 तीव्रता का तेज भूकंप महसूस किया गया। यह इलाका प्रशांत महासागर के खतरनाक 'रिंग ऑफ फायर' का हिस्सा है, जहां दुनिया के 81 प्रतिशत सबसे बड़े भूकंप आते हैं।
NCS earthquake report : समंदर के भीतर सोमवार को धरती में बड़ी हलचल देखने को मिली। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (National Center for Seismology) के बयान के अनुसार, बेरिंग सागर में 6.1 तीव्रता का जोरदार भूकंप (Bering Sea earthquake) आया है। एनसीएस (NCS) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस भूकंप का केंद्र समुद्र के भीतर 45 किलोमीटर की गहराई में स्थित था।
वैज्ञानिकों के अनुसार, वैसे तो बेरिंग सागर का बीच का हिस्सा शांत रहता है, लेकिन इसका उत्तरी और दक्षिणी किनारा हमेशा भूगर्भीय हलचलों का केंद्र रहता है। अलास्का विश्वविद्यालय के एक अध्ययन के मुताबिक, उत्तरी क्षेत्र में पश्चिमी अलास्का से लेकर पूर्वी रूस तक भूकंपीय फॉल्ट लाइन फैली है। वहीं, दक्षिणी हिस्से में एल्यूशियन आर्क (Aleutian Arc) मौजूद है, जहां टेक्टोनिक प्लेटें एक-दूसरे के नीचे खिसक रही हैं (सबडक्शन प्रक्रिया)। प्लेटों के इस घर्षण और दबाव के कारण ही यहां अक्सर धरती कांपती है।
इस इलाके का भूकंप से पुराना नाता रहा है। साल 1991 और फिर 30 अप्रैल 2010 को भी यहां बड़े भूकंप आ चुके हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन भूकंपों का संबंध दुनिया की सबसे बड़ी अंडरवाटर खाई यानी 'ज़ेमचुग कैन्यन' (Zhemchug Canyon) के नीचे मौजूद चट्टानों की बनावट (ग्रैबेन संरचना) से है। जब जमीन के नीचे फॉल्ट लाइन पर दबाव बढ़ता है, तो प्लेटें खिसकती हैं और जोरदार स्ट्राइक-स्लिप (Strike-slip) भूकंप पैदा होते हैं।
अमेरिकी भूविज्ञान विभाग के अनुसार, यह पूरा क्षेत्र प्रशांत महासागर के उस भयानक हिस्से में आता है जिसे "रिंग ऑफ फायर" (Ring of Fire) कहा जाता है। यह दुनिया का सबसे बड़ा और खतरनाक भूकंपीय क्षेत्र है। पूरी दुनिया के 81% सबसे विनाशकारी भूकंप इसी जोन में आते हैं। इतिहास के पन्नों को पलटें तो 1960 में चिली में आया 9.5 तीव्रता का भूकंप और 1964 में अलास्का में आया 9.2 तीव्रता का महाविनाशकारी भूकंप भी इसी 'रिंग ऑफ फायर' के सबडक्शन जोन का ही नतीजा थे।
भूकंप की गहराई 45 किलोमीटर होने के कारण समुद्री भूगर्भशास्त्रियों ने राहत की सांस ली है। हालांकि, इतने तेज झटके के बाद वैज्ञानिक लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। इस बात पर नजर रखी जा रही है कि कहीं अंडरवाटर लैंडस्लाइड (समुद्र के भीतर भूस्खलन) के कारण समुद्री जीवों या स्थानीय इकोसिस्टम पर कोई विपरीत असर तो नहीं पड़ा है।
भूकंप के तुरंत बाद सुनामी चेतावनी केंद्रों को अलर्ट पर रखा गया है। राहत की बात यह है कि फिलहाल किसी बड़ी सुनामी का अलर्ट जारी नहीं किया गया है। अलास्का और रूस के तटीय इलाकों के स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और आफ्टरशॉक्स (भूकंप के बाद के झटकों) की लगातार स्टडी की जा रही है। (इनपुट : ANI)