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US Election Results 2026: भारतीय छात्रों पर नस्लीय टिप्पणी करने वाले Bo French चुनाव हारे, अमेरिकी राजनीति में बढ़ी नस्लवाद पर बहस

Texas Election Results 2026: टेक्सास में भारतीय मूल के छात्रों पर विवादित टिप्पणी करने वाले रिपब्लिकन नेता Bo French चुनाव हार गए। जानिए उनकी हार, नस्लीय राजनीति, भारतीय-अमेरिकी समुदाय और अमेरिकी लोकतंत्र के लिए इसके मायने।
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Updated: 5 Nov 2026, 8:44 AM IST
Bo French Election Results
Bo French Election Results : भारतीयों के खिलाफ बयानबाजी पड़ी भारी! टेक्सास में बो फ्रेंच की करारी हार, रिपब्लिकन पार्टी को मिला बड़ा सबक imageUrl (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)

Bo French Election Results: टेक्सास के चुनावी नतीजे अब सिर्फ स्थानीय चर्चा नहीं रहे। ये ऐसी बहस का हिस्सा बन गए हैं, जिसका असर भारतीय-अमेरिकी समुदाय से लेकर रिपब्लिकन पार्टी की आगे की राजनीति तक दिख रहा है। रिपब्लिकन नेता बो फ्रेंच, जो भारतीय छात्रों और प्रवासियों के खिलाफ विवादित बयान देते रहे, उन्हें मतदाताओं ने साफ तौर पर नकार दिया। उनकी हार के बाद ये सवाल और जोर से उठने लगा है। क्या अमेरिका में पहचान और नस्ल के नाम पर राजनीति करना अब उल्टा पड़ने लगा है

Bo French Election Results: टेक्सास चुनाव में नफरत की राजनीति को झटका, भारतीय-अमेरिकी समुदाय के मुद्दे बने चर्चा का केंद्र

वॉशिंगटन। अमेरिका के टेक्सास में रिपब्लिकन नेता बो फ्रेंच की चुनावी हार ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। टेक्सास रेलरोड कमीशन के चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जॉन रोसेन्थल ने फ्रेंच को 6 लाख से अधिक वोटों के अंतर से पीछे छोड़ दिया। यह मुकाबला केवल एक सरकारी पद की जीत-हार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय के प्रति राजनीतिक रवैये और नस्लीय बयानबाजी पर जनमत की परीक्षा भी बन गया।

भारतीय मूल के छात्रों पर टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद

विवाद की शुरुआत 13 सितंबर को फ्रेंच की सोशल मीडिया पोस्ट से हुई। टेक्सास विश्वविद्यालय की फुटबॉल जीत के बाद भारतीय मूल के छात्रों की तस्वीर साझा करते हुए उन्होंने अमेरिकी विश्वविद्यालयों में विदेशी लोगों की बढ़ती मौजूदगी पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे अमेरिकी नागरिकों के विस्थापन से जोड़ने की कोशिश की।

हालांकि, तस्वीर में मौजूद कई छात्र अमेरिकी नागरिक थे। भारतीय मूल के धैर्य गुप्ता भी उनमें शामिल थे, जो अमेरिकी नागरिकता प्राप्त कर चुके हैं। ऐसे में फ्रेंच की टिप्पणी को लेकर सवाल उठे कि क्या किसी व्यक्ति की त्वचा का रंग उसकी नागरिकता तय करने का आधार हो सकता है।

अपनी ही पार्टी में बढ़ा विरोध

फ्रेंच के बयान की रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी आलोचना हुई। अमेरिकी सीनेटर जॉन कॉर्निन ने उनकी टिप्पणी को पार्टी के लिए शर्मिंदगी का कारण बताया। कॉर्निन लंबे समय से भारत-अमेरिका संबंधों और भारतीय-अमेरिकी समुदाय के समर्थन में सक्रिय रहे हैं।

टेक्सास में भारतीय निवेश आकर्षित करने के लिए रिपब्लिकन नेतृत्व पहले भी प्रयास करता रहा है। वर्ष 2018 और 2024 में गवर्नर ग्रेग एबॉट ने भारत के साथ व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए दौरे किए। सितंबर 2019 में ह्यूस्टन में आयोजित 'हाउडी मोदी' कार्यक्रम में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय को संबोधित किया था।

एच-1बी वीजा और धार्मिक विवाद ने बढ़ाई चिंता

टेक्सास के फ्रिस्को, प्लानो और इरविंग जैसे शहरों में भारतीय-अमेरिकी आबादी बड़ी संख्या में रहती है। यहां एच-1बी वीजा को लेकर रोजगार और स्थानीय पहचान पर बहस तेज हुई है। कुछ लोगों ने भारतीय प्रवासियों पर अमेरिकी नौकरियां लेने के आरोप लगाए।

ऑनलाइन अभियान के दौरान एच-1बी कर्मचारियों की निजी जानकारी सार्वजनिक किए जाने की घटनाओं ने भी चिंता बढ़ाई। वहीं, एबॉट द्वारा सरकारी एजेंसियों और सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में नए एच-1बी वीजा आवेदन रोकने के फैसले ने समुदाय की आशंकाओं को और गहरा किया।

धार्मिक पहचान भी विवाद का हिस्सा बनी। शुगर लैंड स्थित अष्टलक्ष्मी मंदिर में हनुमान की 90 फुट ऊंची प्रतिमा को लेकर धमकियां सामने आईं। इससे भारतीय समुदाय में सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर चिंता बढ़ी।

Updated on:
5 Nov 2026, 8:44 AM IST
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