
Brazil Election: ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा की जीत के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया है। चुनाव में हारने वाले उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो ने नतीजों को मानने से इनकार कर दिया है और चुनाव को रद्द कराने के लिए कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है। उन्होंने मतदान की अवधि को दो घंटे बढ़ाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाए हैं। फ्लावियो बोल्सोनारो ने कहा कि जिस तरह से चीजें सामने आई हैं, उसे देखते हुए चुनाव नतीजों को स्वीकार करना असंभव है।
लिबरल पार्टी के उम्मीदवार और सीनेटर फ्लेवियो बोल्सोनारो ने ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव के निर्णायक दौर (रन-ऑफ राउंड) में मतदान का समय दो घंटे बढ़ाने के सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस क्रिस्टियानो जानिन के फैसले पर नाराजगी जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के चुनावी इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि मतदान खत्म होने के ठीक समय पर नियमों को इस तरह मनमाने ढंग से बदल दिया गया हो।
बोल्सोनारो ने बताया कि आधिकारिक तौर पर मतदान शाम 5:00 बजे खत्म होना था, लेकिन शाम 5:01 बजे अचानक एक आदेश जारी कर मतदान का समय दो घंटे और बढ़ा दिया गया, जो बिल्कुल भी सामान्य नहीं है। उन्होंने कहा कि इस अप्रत्याशित फैसले ने पूरी चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बोल्सोनारो ने कहा कि खेल के नियम बिल्कुल आखिरी समय पर मनमाने ढंग से बदल दिए गए। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में अपनी नियुक्ति से पहले, जस्टिस जानिन राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा के निजी डिफेंस अटॉर्नी रह चुके हैं। बोल्सोनारो खेमे का दावा है कि मतदान का समय बढ़ाने का आदेश ऐसे समय में जारी किया गया, जब कई मतदान केंद्रों पर वोटिंग मशीनें पहले ही बंद की जा चुकी थीं। उनके अनुसार, इससे भ्रम पैदा हुआ और इसका मकसद विशेष रूप से मौजूदा पक्ष (लूला डा सिल्वा के खेमे) को फायदा पहुंचाना था।
इस कड़े मुकाबले वाले रन-ऑफ में लूला डा सिल्वा के आगे रहने के बाद फ्लावियो बोल्सोनारो ने हार मानने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा है कि वे चुनावी प्रक्रिया को कानूनी रूप से चुनौती देंगे और अदालत का दरवाजा खटखटाकर चुनाव को अमान्य घोषित करने की मांग करेंगे।
अल जजीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, आशंका है कि चुनाव के बाद कानूनी लड़ाई छिड़ सकती है और मतदान का समय बढ़ाने को लेकर हुए विवाद ने इस संभावना को और हवा दे दी है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जायर बोल्सोनारो की पार्टी ने कांग्रेस में अपनी स्थिति मजबूत की है और कई अहम राज्यों में दक्षिणपंथी विचारधारा वाले गवर्नरों का शासन है। ऐसे में चुनाव के बाद का टकराव केवल कानूनी दायरे तक सीमित नहीं रह सकता, इससे राजनीतिक तनाव और बढ़ सकता है, जिसमें सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भी शामिल हो सकते हैं।