अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कनाडा पर 100% टैरिफ की धमकी और ’51वीं राज्य’ वाली टिप्पणी ने ओटावा को अपनी आर्थिक निर्भरता कम करने के लिए मजबूर कर दिया है। कनाडा अब भारत को रणनीतिक साझेदार मानकर व्यापार विविधीकरण की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। कनाडाई विदेश मंत्री अनिता आनंद ने डावोस […]
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कनाडा पर 100% टैरिफ की धमकी और '51वीं राज्य' वाली टिप्पणी ने ओटावा को अपनी आर्थिक निर्भरता कम करने के लिए मजबूर कर दिया है। कनाडा अब भारत को रणनीतिक साझेदार मानकर व्यापार विविधीकरण की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। कनाडाई विदेश मंत्री अनिता आनंद ने डावोस में साफ कहा, "कनाडा कभी 51वीं राज्य नहीं बनेगा।" उन्होंने जोर दिया कि अगले 10 सालों में गैर-अमेरिकी निर्यात दोगुना किया जाएगा, और इसी वजह से चीन के बाद अब भारत की ओर रुख किया जा रहा है।
ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर कनाडा चीनी निर्यात के लिए 'ड्रॉप ऑफ पोर्ट' बना, तो कनाडाई सामानों पर 100% टैरिफ लगाएंगे। यह धमकी कनाडा के 49,000 चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों को अनुमति देने के सौदे से जुड़ी है। ट्रंप की नीतियां कनाडा की अर्थव्यवस्था को झटका दे रही हैं, जहां 75% से ज्यादा निर्यात अमेरिका पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आर्थिक जबरदस्ती है, जिसमें पानी, ऊर्जा और खनिजों तक पहुंच की मांग शामिल हो सकती है।
कनाडाई PM मार्क कार्नी मार्च 2026 के पहले सप्ताह में भारत का दौरा करेंगे, जो भारत के केंद्रीय बजट (1 फरवरी) के बाद होगा। भारतीय उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने इसकी पुष्टि की। दौरा CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement) वार्ता शुरू करने, यूरेनियम, ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स, LNG, AI और परमाणु सहयोग पर समझौतों पर फोकस करेगा। द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 50 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य है।
भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर विदेश मंत्री एस जयशंकर और अनिता आनंद के बीच 'फलदायी बातचीत' हुई। दोनों ने उच्च स्तरीय आदान-प्रदान, आर्थिक साझेदारी और निरंतर संपर्क पर जोर दिया। 2023 में सिख अलगाववादी नेता की हत्या के आरोप से तनावपूर्ण रहे संबंध अब सुधर रहे हैं – दूतों की बहाली, खुफिया साझेदारी और ट्रेड मिशन की योजना बन गई है।
ट्रंप की नीतियों से भारत भी प्रभावित है (रूसी तेल खरीद पर 35-50% टैरिफ), इसलिए कनाडा के साथ साझेदारी ऊर्जा सुरक्षा और उत्तर अमेरिकी बाजार पहुंच बढ़ाएगी। कनाडा को स्थिर लोकतांत्रिक पार्टनर मिलेगा, जबकि भारत को क्रिटिकल मिनरल्स और यूरेनियम में लाभ होगा। आनंद ने कहा, "व्यापार विविधीकरण कनाडाई अर्थव्यवस्था की रक्षा के लिए मौलिक है।" यह पिवट ट्रंप की आक्रामकता के खिलाफ 'मिडिल पावर' गठजोड़ का हिस्सा है, जो भारत-कनाडा संबंधों में नई शुरुआत ला रहा है।