ताइवान की सेना में चीन अब आम सैनिकों तक घुसपैठ बढ़ा रहा है। सुरक्षा ब्यूरो प्रमुख त्साई मिंग येन ने संसद में खुलासा किया कि चीन अपनी रणनीति बदलकर छोटे रैंक के जवानों को टारगेट कर रहा है।
ताइवान की सेना में चीन आम सैनिकों तक घुसपैठ बढ़ा रहा है। वहां चीन अपने खुफिया तंत्र को और मजबूत कर रहा है। ताइवान की नेशनल सिक्योरिटी ब्यूरो के डायरेक्टर जनरल त्साई मिंग येन ने इस बात का खुलासा किया है।
उन्होंने ताइवान की संसद में कहा कि चीन अब सिर्फ बड़े अधिकारियों पर नहीं, बल्कि साधारण रैंक के सैनिकों और जवान स्तर पर फोकस कर रहा है। पहले चीन मिडिल लेवल के अफसरों को टारगेट करता था, लेकिन अब उसकी रणनीति बदल गई है।
मिंग ने कहा कि अब चीन ताइवान में छोटे स्तर के सैनिकों को पैसे, एक्सचेंज प्रोग्राम और लोकल लोगों के जरिए अपने साथ मिलाने की कोशिश कर रहा है। ये सब कुछ प्लान के मुताबिक और संगठित तरीके से हो रहा है।
उन्होंने कहा कि खुफिया जानकारी इकट्ठा करने, सुरक्षा रणनीति और यूनाइटेड फ्रंट जैसे कामों को एक साथ जोड़कर चीन ताइवान की संस्थाओं में घुस रहा है।
ताइवान के सुरक्षा प्रमुख ने कहा कि चीन की ये गतिविधियां रैंडम नहीं हैं, बल्कि पूरी तरह से ऑर्गनाइज्ड नेटवर्क के जरिए चल रही हैं। वे एक्सचेंज प्रोग्राम और मध्यस्थों का इस्तेमाल करके लोगों को अपने पाले में ला रहे हैं।
इसके अलावा, चीन ने मार्च के अंत से मई की शुरुआत तक येलो सी से ईस्ट चाइना सी तक बड़े एयरस्पेस जोन रिजर्व कर रखे हैं। ये इलाका दक्षिण कोरिया और जापान के पास है।
बीजिंग ने इसका कोई साफ कारण नहीं बताया है, लेकिन ताइवान का मानना है कि ये सैन्य और राजनीतिक मकसद से किया गया है। खासतौर पर अमेरिका की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ऐसा किया गया है।
इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप-चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की होने वाली मीटिंग से पहले रिएक्शन टेस्ट करने के लिए भी ऐसा किया जा सकता है।
इस हफ्ते एक अमेरिकी रेकॉनिसेंस प्लेन इन जोन्स में घुसा था, जिसके बाद चीन की ये हरकतें और भी ध्यान खींच रही हैं। ताइवान अब इन ग्रे जोन टैक्टिक्स का मुकाबला करने के लिए अपनी एजेंसियों के बीच बेहतर कोऑर्डिनेशन बढ़ा रहा है और अंतरराष्ट्रीय पार्टनर्स के साथ समुद्री निगरानी पर ज्यादा ध्यान दे रहा है।