
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग। (फोटो- AI)
(China covert operation Taiwan) 20 साल तक एक शख्स ताइवान आता रहा, घूमता रहा, लोगों से मिलता रहा और चीन का संदेश फैलाता रहा। लेकिन उसको लेकर किसी को शक नहीं हुआ। यह कोई जासूसी फिल्म की कहानी नहीं है, बल्कि ताइवान में हकीकत में ऐसा हो रहा था।
अब जब मामला अदालत तक पहुंचा है तो ताइवान के जानकार कह रहे हैं कि यह सिर्फ एक केस नहीं है, यह एक बड़े और सोचे-समझे खेल की एक झलक है।
सन शियान चीन का एक राजनीतिक शख्स है जो शंघाई में चाइनीज कुओमिंतांग की रिवोल्यूशनरी कमेटी से जुड़ा है। वह ताइवान में बिल्कुल सही कागज-पत्रों के साथ आता था, दिखावे के लिए एक वजह बताता था और फिर पूरे ताइवान में घूमता था।
वहां वह उन लोगों से मिलता था जो चीन से ताइवान में शादी करके आए हैं। इन मुलाकातों में वह बीजिंग का 'एक देश दो व्यवस्था' वाला फॉर्मूला समझाता था। यही वो फॉर्मूला है जिसके तहत चीन चाहता है कि ताइवान उसका हिस्सा बन जाए।
इस पूरे मामले में एक अहम नाम है शू चुनयिंग का। वह चीन में पैदा हुई और शादी के बाद ताइवान में रहने लगी। वह ताइवान न्यू इमिग्रेंट डेवलपमेंट एसोसिएशन की अध्यक्ष है।
आरोप है कि शू ने ही सन शियान की इन बार-बार की यात्राओं को आसान बनाया और चुनावों में दखल देने की कोशिशों में मदद की। ताइवान के एंटी-इनफिल्ट्रेशन कानून के तहत उन पर मुकदमा दर्ज किया गया है।
तुंगहाई यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ हुंग पु-चाओ कहते हैं कि चीन ने अपना तरीका बदल लिया है। अब वह कोई नया जासूसी नेटवर्क नहीं बनाता।
बजाय इसके वह उन रास्तों का इस्तेमाल करता है जो पहले से खुले हैं, जैसे कारोबारी रिश्ते, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और शादी के जरिए आए लोगों के समुदाय।
यह तरीका इसलिए खतरनाक है क्योंकि सब कुछ कानूनी दिखता है। कोई नियम नहीं तोड़ा जाता, कम से कम कागज पर तो नहीं। इसलिए पकड़ना बेहद मुश्किल हो जाता है।
Published on:
03 Apr 2026 05:30 pm
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