
China Russia Military Support Ukraine War: क्या सचमुच चीन और रूस के बीच दोस्ती गहराती जा रही है। एक तरफ दावा यह किया जा रहा है कि ताइवान-चीन तनाव के बीच रूस, ताइवान पर हवाई हमले की तैयारी में चीन की मदद कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि रूस-यूक्रेन युद्ध में चीन, रसिया की बैकेंड से मदद पहुंचा रहा है।
वेस्टर्न कंट्रीज और कई इंटरनेशनल रिपोर्टों में दावा किया गया है कि चीन खुद युद्ध में तो सीधे शामिल नहीं है, लेकिन वह टेक्नोलॉजी , मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट और अन्य गैजेट के जरिए रसिया को मजबूत कर रहा है। हालांकि चीन लगातार इन आरोपों से इनकार करता आया है। वह खुद को इस वॉर से अलग-थलग बताता है।
यूरोपीय यूनियन की फॉरेन पॉलिसी चीफ काजा कालास ने चीन को रूस की जंग का सबसे करीबी सपोर्टर बताया।
रिपोर्टों के मुताबिक, चीन रूस को सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स, मशीन टूल्स और अन्य तकनीकी उपकरण उपलब्ध करा रहा है, जिनका इस्तेमाल हथियारों और मिसाइलों के निर्माण में किया जाता है।
यूरोपीय अधिकारियों के अनुसार, 2021 से 2023 के बीच रूस के ड्यूल-यूज आयात में चीन की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत से बढ़कर 66 प्रतिशत हो गई। वहीं 2025 में यूरोपीय यूनियन के सेंक्शन क्वार्डिनेटर डेविड ओसुलिवन ने अनुमान लगाया था कि रूस के हथियार इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाले लगभग 80 प्रतिशत पुर्जे चीन से आ रहे हैं।
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि रूस और चीन के बीच सैन्य सहयोग भी लगातार बढ़ रहा है। आरोप है कि रूसी सैनिकों ने चीन में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ संयुक्त प्रशिक्षण लिया, जबकि चीन यूक्रेन युद्ध से मिले रूस के सैन्य अनुभवों का अध्ययन कर रहा है। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि चीन ड्रोन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एयर डिफेंस सिस्टम जैसे क्षेत्रों में रूस के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। यूक्रेन ने पहले भी आरोप लगाया था कि कुछ चीनी नागरिक और कंपनियां रूस के युद्ध प्रयासों में बैकेंड से मदद पहुंचा रहा है। वहीं कुछ पश्चिमी मीडिया रिपोर्टों में चीन पर रूस को सैटेलाइट डेटा और आधुनिक तकनीकी उपकरण उपलब्ध कराने के आरोप भी लगाए गए हैं।
हालांकि देखा जाए तो चीन इन सभी आरोपों को खारिज करता रहा है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि उसने कभी भी किसी देश को घातक हथियार उपलब्ध नहीं कराए हैं। वो भी युद्ध के समय…उसका दावा है कि वह हमेशा निष्पक्ष रहा है।
वहीं जानकारों का मानना है कि यूक्रेन युद्ध से चीन आधुनिक युद्ध की रणनीतियों और नई सैन्य तकनीकों का अध्ययन कर रहा है। इससे ताइवान को लेकर पश्चिमी देशों की चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि रूस और चीन के बीच तकनीकी और सैन्य सहयोग इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर केवल यूक्रेन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।