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ट्रंप के खिलाफ चीन-पाक एकजुट? ईरान युद्ध को लेकर बीजिंग की नई रणनीति ने उड़ाई व्हाइट हाउस की नींद

Iran US War: चीन ने नागरिकों और नागरिक सुविधाओं पर हमलों का विरोध किया। माओ निंग ने कहा कि लंबे समय तक चलने वाली लड़ाई और बढ़ता संघर्ष किसी के हित में नहीं है।

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Mar 30, 2026
Donald Trump (Photo - Washington Post)

Iran US War: मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान युद्ध की आग भड़क रही है। डोनाल्ड ट्रंप की नई धमकियों के बीच चीन ने साफ-साफ अमेरिका की निंदा की है और सैन्य कार्रवाई को समस्या का समाधान नहीं बताया। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने सोमवार को कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान तुरंत रोक दिया जाए और शांति वार्ता शुरू की जाए। उन्होंने जोर देकर कहा, 'जब तक सैन्य कार्रवाई बंद नहीं होगी, तब तक किसी भी समस्या का समाधान नहीं खोजा जा सकता।'

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जंग से किसी का भला नहीं

चीन ने नागरिकों और नागरिक सुविधाओं पर हमलों का विरोध किया। माओ निंग ने कहा कि लंबे समय तक चलने वाली लड़ाई और बढ़ता संघर्ष किसी के हित में नहीं है। बीजिंग ने तनाव कम करने के पाकिस्तान के प्रयासों की सराहना की और कहा कि वह मध्यस्थता का समर्थन करता है। चीन पाकिस्तान और अन्य पक्षों के साथ मिलकर दुश्मनी खत्म करने और शांति स्थापित करने के लिए तैयार है।

चीन और पाकिस्तान ने उड़ाई व्हाइट हाउस की नींद

पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने 29 मार्च को कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता की मेजबानी करना इस्लामाबाद के लिए सम्मान की बात होगी। चीन ने इस मध्यस्थता को बढ़ावा देते हुए पाकिस्तान की तारीफ की। यह बयान ट्रंप प्रशासन के लिए चिंता का सबब बन गया है, क्योंकि चीन और पाकिस्तान की यह एकजुटता व्हाइट हाउस की नींद उड़ा रही है।

ट्रंप ने फिर दी ईरान को कड़ी चेतावनी

ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान जल्द समझौता नहीं करता और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नहीं खोलता, तो अमेरिका उसके पावर प्लांट, ऑयल वेल्स और खार्ग द्वीप को तबाह कर देगा। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने जानबूझकर इन जगहों को अभी छुआ नहीं है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी चेताया कि ईरान अगर राजी नहीं हुआ तो अमेरिका हर स्थिति के लिए तैयार है।

ईरान ने अमेरिकी प्रस्तावों को ज्यादातर अस्वीकार्य बताया है। तेहरान का कहना है कि कई शर्तें स्वीकार नहीं की जा सकतीं। इस बीच पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच संदेशवाहक की भूमिका निभा रहा है। चीन की नई रणनीति सैन्य रास्ते की बजाय कूटनीतिक हल पर जोर दे रही है, जो ट्रंप की आक्रामक नीति के खिलाफ है।

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