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चीन ने दोबारा इस्तेमाल होने वाले रॉकेट का किया सफल परीक्षण

China's Successful Test: चीन ने दोबारा इस्तेमाल होने वाले रॉकेट का सफल परीक्षण करते हुए स्पेस सेक्टर में एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम की।
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Jul 11, 2026
China reusable rocket
चीन ने दोबारा इस्तेमाल होने वाले रॉकेट का किया सफल परीक्षण (Photo - Video screenshot)

चीन (China) ने दोबारा इस्तेमाल होने वाले रॉकेट का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। इस रॉकेट का नाम लॉन्ग मार्च-10बी है। इस सफलता के साथ चीन उन गिने-चुने देशों में शामिल हो गया है जो बड़े ऑर्बिटल रॉकेट के बूस्टर को सुरक्षित वापस लाने में सफल हुए हैं। चीन से पहले सिर्फ अमेरिका (United States of America) ने ही ऐसा किया है। चीन के इस मिशन की सबसे खास बात यह रही कि चीन ने रॉकेट को ज़मीन या समुद्र में बने लैंडिंग पैड पर उतारने के बजाय समुद्र में तैरते एक विशेष प्लेटफॉर्म पर लगे जाल और हुक की मदद से पकड़ लिया।

पहली बार इस्तेमाल हुआ यह तरीका

रॉकेट को जाल और हुक की मदद से पकड़ने का तरीका दुनिया में पहली बार इस्तेमाल किया गया है। चीन का लॉन्ग मार्च-10बी रॉकेट 70 मीटर ऊंचा है। यह पृथ्वी की निचली कक्षा में कार्गो और सैटेलाइट भेजने के लिए बनाया गया है।

कैसे हुआ सफल टेस्ट?

उड़ान भरने के लगभग छह मिनट बाद रॉकेट का पहला हिस्सा अलग हो गया। इसके बाद यह नियंत्रित तरीके से वापस पृथ्वी की ओर लौटा। इसके बाद इसे सीधे समुद्र में मौजूद प्लेटफॉर्म पर लगे जाल और हुक की मदद से पकड़ा गया।

रॉकेट की क्षमता

चीन के लॉन्ग मार्च-10बी रॉकेट के पहले हिस्से में 7 वाइएफ-100के इंजन लगे हैं, जो तरल ऑक्सीज़न और केरोसीन से चलते हैं। यह 16 टन तक का वज़न पृथ्वी की निचली कक्षा में पहुंचा सकता है।

क्यों अहम है यह उपलब्धि?

पहले रॉकेट का पहला हिस्सा मिशन पूरा होने के बाद समुद्र में गिर जाता था और दोबारा इस्तेमाल नहीं हो पाता था। इससे हर लॉन्च बहुत महंगा पड़ता था। अब अगर रॉकेट का पहला हिस्सा सुरक्षित वापस आ जाए और उसे दोबारा इस्तेमाल किया जा सके, तो लॉन्च की लागत काफी कम हो जाएगी। इससे ज़्यादा सैटेलाइट सस्ते में अंतरिक्ष में भेजे जा सकेंगे और भविष्य में चंद्रमा और गहरे अंतरिक्ष मिशन भी आसान होंगे।

अमेरिका की तकनीक अलग

अमेरिकी कंपनी स्पेसएक्स अपने फाल्कन 9 रॉकेट के बूस्टर को सीधा ज़मीन या समुद्र में मौजूद ड्रोन शिप पर उतारती है। वहीं ब्लू ओरिजिन भी इसी तरह की वर्टिकल लैंडिंग तकनीक का इस्तेमाल करती है।

Updated on:
11 Jul 2026 01:52 am
Published on:
11 Jul 2026 01:52 am