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दलाई लामा को ग्रेमी अवार्ड मिलने पर भड़का चीन, अमेरिका को सुनाई खरी-खोटी, समर्थकों में खलबली

Political Manipulation: दलाई लामा को ग्रैमी अवार्ड मिलने पर चीन ने अमेरिका को खरी-खोटी सुनाई है। बीजिंग ने इसे 'राजनीतिक हेरफेर' बताते हुए तिब्बत मुद्दे पर अपनी नाराजगी जाहिर की।

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Feb 02, 2026
तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा। ( फोटो: ANI)

Separatist:संगीत की दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित सम्मान 'ग्रैमी अवार्ड्स' (Grammy Awards) की गूंज इस बार अमेरिका से ज्यादा चीन में सुनाई दे रही है। तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा को ग्रैमी अवार्ड (Dalai Lama Grammy Award) मिलने पर चीन का पारा (China Reaction Dalai Lama) सातवें आसमान पर पहुंच गया है। जहां पूरी दुनिया इसे शांति और आध्यात्मिकता का सम्मान मान रही है, वहीं चीन ने इसे "राजनीतिक हेरफेर" (Political Manipulation) करार दिया है। चीनी विदेश मंत्रालय ने सख्त लहजे में कहा है कि अमेरिका सांस्कृतिक मंचों का चीन के खिलाफ "हथियार" के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।

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चीन को क्यों लगी मिर्ची?

ध्यान रहे कि 68वें ग्रैमी अवार्ड्स में दलाई लामा को उनकी रिकॉर्डिंग 'मेडिटेशन: द रिफ्लेक्शंस ऑफ हिज होलीनेस द दलाई लामा' के लिए सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार उन्हें 'बेस्ट ऑडियो बुक, नरेशन एंड स्टोरीटेलिंग' श्रेणी में मिला। चीन का आरोप है कि इस पुरस्कार के जरिये अमेरिका ने दलाई लामा की "अलगाववादी छवि" को सफेद करने की कोशिश की है।

अवार्ड का मकसद लामा के राजनीतिक एजेंडे को अंतरराष्ट्रीय मंच देना: चीन

चीनी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, "हम इस तरह के कदमों का कड़ा विरोध करते हैं। दलाई लामा कोई साधारण धार्मिक व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि वे धर्म का चोला पहन कर चीन विरोधी गतिविधियों में लिप्त एक राजनीतिक निर्वासित (Political Exile) हैं।" चीन का मानना है कि इस अवार्ड का मकसद दलाई लामा के राजनीतिक एजेंडे को अंतरराष्ट्रीय मंच देना है।

'धर्म की आड़ में राजनीति' (Tibet Issue)

चीन ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह दलाई लामा को एक मोहरे की तरह इस्तेमाल कर रहा है। बीजिंग का कहना है कि ग्रैमी जैसे प्रतिष्ठित मंच को राजनीति से दूर रहना चाहिए था। चीन ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि ऐसे कदम चीन और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों के लिए अच्छे नहीं हैं। चीन का डर है कि इस पुरस्कार से तिब्बत की आजादी की मांग करने वाले समूहों को वैश्विक स्तर पर नया बल मिलेगा।

उत्तराधिकारी के मुद्दे पर फिर अड़ा चीन

इस विवाद के बीच चीन ने एक बार फिर दलाई लामा के उत्तराधिकारी (Succession) के संवेदनशील मुद्दे को हवा दे दी है। इस घटनाक्रम के तुरंत बाद, चीनी अधिकारियों ने दोहराया कि दलाई लामा के पुनर्जन्म या उनके उत्तराधिकारी का फैसला ऐतिहासिक परंपराओं और चीन के कानूनों के तहत ही होगा। यह बयान तिब्बती समुदाय के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि वे चीन की ओर से नियुक्त किसी भी धर्मगुरु को मानने से इनकार करते रहे हैं।

दो धड़ों में बंट गई दुनिया

इस खबर पर तीखी और भावनात्मक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं:

चीन समर्थक: चीनी सोशल मीडिया 'वीबो' (Weibo) पर यूजर्स इसे पश्चिमी देशों की साजिश बता रहे हैं। उनका कहना है कि एक 'अलगाववादी' को ग्लोरीफाई किया जा रहा है।

तिब्बती समुदाय: वहीं, धर्मशाला और दुनिया भर में रह रहे तिब्बतियों ने इसे सत्य और शांति की जीत बताया है। उनका कहना है कि "चीन की बंदूकें दलाई लामा की शांति की आवाज को नहीं दबा सकतीं।"

अमेरिका: अमेरिकी मानवाधिकार समूहों का कहना है कि यह अवार्ड दलाई लामा के आध्यात्मिक योगदान के लिए है, न कि राजनीति के लिए।

अब आगे क्या हो सकता है?

राजनयिक तनाव: आने वाले दिनों में चीन और अमेरिका के बीच वाकयुद्ध और तेज हो सकता है। चीन इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मान कर अमेरिकी सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर कुछ प्रतिबंध लगा सकता है।

तिब्बत मुद्दा: लंबे समय से शांत पड़ा तिब्बत का मुद्दा अब अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में रहेगा। दलाई लामा के समर्थक इस अवसर का चीन की दमनकारी नीतियों को उजागर करने के लिए उपयोग कर सकते हैं।

संगीत बना शांति का दूत

इस खबर का एक खूबसूरत पहलू यह है कि 80 से अधिक उम्र के एक भिक्षु ने आधुनिक संगीत जगत के दिग्गजों के बीच अपनी जगह बनाई है।

इनर वर्ल्ड (Inner World): जिस एलबम के लिए यह अवार्ड मिला, उसमें दलाई लामा ने मंत्रों का उच्चारण किया है और ध्यान (Meditation) की विधियां बताई हैं।

सॉफ्ट पावर: विश्लेषकों का मानना है कि यह दलाई लामा की 'सॉफ्ट पावर' है। चीन के पास आर्थिक और सैन्य ताकत हो सकती है, लेकिन दलाई लामा के पास सांस्कृतिक और आध्यात्मिक प्रभाव है, जो ग्रैमी जैसे मंचों तक पहुंच रखता है।

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