विदेश

डेनमार्क ने सेना को दिए भारी गोलीबारी करने के निर्देश; आखिर अमेरिका की किस हरकत ने इस देश को उकसाया

Denmark PM Mette Frederiksen Warns Trump: डेनमार्क और संयुक्त राष्ट्र अमेरिका दोनों देश अब ग्रीनलैंड को लेकर एक-दूसरे को सैन्य कार्रवाई की धमकियां दे रहे हैं। अमेरिका ने कहा था कि वह ग्रीनलैंड के लिए सैन्य कार्रवाई कर सकता है, तो अब डेनमार्क ने भी अब भारी गोलीबारी करने की धमकी दी है।

3 min read
Jan 09, 2026
Denmark PM warns Trump
डेनमार्क ने सेना को दिए भारी गोलीबारी करने के निर्देश (Photo-IANS0

US Denmark Tensions: डेनमार्क और संयुक्त राष्ट्र अमेरिका ग्रीनलैंड को लेकर आमने-सामने हो रहे हैं। इस बीच यूरोपीय नेताओं ने भी डेनमार्क और ग्रीनलैंड का पक्ष रखा है। उन्होंने ग्रीनलैंड को एक स्वतंत्र क्षेत्र बताते हुए ट्रंप के ग्रीनलैंड को हासिल करने के प्रयासों की आलोचना की है।

इसके साथ ही डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने सोमवार को ट्रंप को खुली चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि ग्रीनलैंड पर अमेरिका का कोई भी हमला नाटो गठबंधन को खत्म कर देगा। इसका प्रभाव द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद स्थापित किए गए सुरक्षा इंतजामों पर पड़ेगा। हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिकी कब्जे में लेने के लिए तर्क दिया है कि आर्कटिक सागर में चीन और रूस से होने वाले संभावित खतरों की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इन खतरों पर नियंत्रण करने और टालने के लिए आर्कटिक सागर में अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दुनिया के सबसे बड़े द्वीप ग्रीनलैंड पर नियंत्रण रखना जरूरी है।

बिना आदेश के भारी गोलीबारी होगी

अमेरिका की धमकियों के बाद, डेनमार्क ने चेतावनी दी है कि अगर कोई भी विदेशी ताकत डेनिश क्षेत्र या ग्रीनलैंड पर हमला करने की गलती करती है, तो उसके सैनिक जवाबी कार्रवाई करने के लिए तैयार हैं। डेनमार्क के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि सैनिकों को तुरंत एक्शन लेने के निर्देश हैं और अगर हमला हुआ तो भारी गोलीबारी होगी और हर एक हमले का जवाब मिलेगा।

डेनमार्क के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि सैनिकों को आदेशों की प्रतीक्षा किए बिना गोलीबारी करने के निर्देश हैं। यह नियम 1940 में नाजी द्वारा डेनमार्क पर आक्रमण के बाद लागू किया गया था, जब संचार व्यवस्था ठप हो गई थी और कमांडर निर्देश जारी नहीं कर पा रहे थे। तब से यह निर्देश बना हुआ है।

ग्रीनलैंड के पास नहीं है खुद की सेना

ग्रीनलैंड के पास अपनी खुद की सेना नहीं है। ग्रीनलैंड की सारी जिम्मेदारी डेनमार्क के पास है। डेनमार्क ग्रीनलैंड की रक्षा और विदेश नीति से संबंधित मामले देखता है। ग्रीनलैंड पर डेनमार्क का काफी हद तक नियंत्रण है। बता दें कि 2009 के बाद ग्रीनलैंड सरकार को तटीय सुरक्षा और कुछ विदेशी मामलों में छूट मिली थी। हालांकि, रक्षा और विदेश नीति के मुख्य मामले अभी भी डेनमार्क के नियंत्रण में हैं।

राजदूतों के बीच मुलाकात

ग्रीनलैंड विवाद बढ़ने के बाद डेनमार्क और ग्रीनलैंड के राजदूतों ने वॉशिंगटन में अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात की थी। इसका उद्देश्य ट्रम्प प्रशासन को ग्रीनलैंड योजना से पीछे हटने के लिए मनाना था। बता दें कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो अगले सप्ताह डेनिश अधिकारियों से मिलने वाले हैं। साथ ही, यह विवाद बढ़ने से यूरोपीय नेता डेनमार्क के समर्थन में एकजुट होने लगे हैं। यूरोपीय नेताओं का कहना है कि ग्रीनलैंड एक स्वतंत्र क्षेत्र है और इससे जुड़ा कोई भी फैसला केवल और केवल वहां के लोग ही करेंगे।

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने दी चेतावनी

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए अमेरिका के द्वारा ग्रीनलैंड पर अपना अधिकार हासिल करने के प्रयासों को सही ठहराया है। साथ ही उन्होंने डेनमार्क की नाकामियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "ग्रीनलैंड अमेरिका के साथ-साथ दुनिया की सुरक्षा के लिए भी एक अहम क्षेत्र है।" उन्होंने डेनमार्क पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि डेनमार्क ने ग्रीनलैंड की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट रूप से काम नहीं किए हैं। साथ ही उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आर्कटिक में अमेरिकी हितों की रक्षा करने के लिए हर संभव प्रयास करने को तैयार हैं।

इसके अतिरिक्त व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलीन लेविट ने मंगलवार को कहा था कि उनकी टीम ग्रीनलैंड पर कंट्रोल करने के हर संभव तरीकों को तलाश रही है। उन्होंने कहा कि इन तरीकों में सैन्य बल जैसे तरीके भी शामिल किए गए हैं।

Published on:
09 Jan 2026 06:11 pm