
अगर आपकी अंग्रेजी के टीचर आपको कभी 'आउट ऑफ स्टेशन' (आउटस्टेशन का बिगड़ा रूप) कहने पर टोकते थे, तो अब आप उन्हें ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी (Oxford Dictionary) का हवाला दे सकते हैं। ऑक्सफोर्ड ने अपने ताज़ा अपडेट में दुनियाभर की क्षेत्रीय बोलियों के साथ-साथ भारत (India) के कई लोकप्रिय और पारंपरिक शब्दों को भी अंग्रेजी भाषा का आधिकारिक हिस्सा मान लिया है। 'चीता', 'पजामा', 'पक्का' 'लूट', 'बंगला', 'जगरनॉट' (भगवान जगन्नाथ का रथ) और 'कर्मा' जैसे सैकड़ों शब्दों को सालों पहले अपनाने वाली भाषा में इन नए शब्दों के 'जुगाड़' के साथ अंग्रेजी और ज़्यादा समावेशी और समृद्ध हो गई है। दुनिया के हर कोने से ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ने इस बार कुल 900 नए शब्दों को जोड़ा है।
ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी की ताज़ा सूची में 'अफेक्टी' शब्द भी शामिल है, जिसका इस्तेमाल किसी हादसे या घटना से प्रभावित व्यक्ति के लिए किया जाता है। इसके अलावा मोबाइल युग से पहले देश के हर नुक्कड़ पर दिखने वाले 'पब्लिक कॉल ऑफिस' (पीसीओ) को भी डिक्शनरी में जगह मिली है। वहीं बंगाल की पारंपरिक लोक कला चावल के आटे से फर्श पर बनाई जाने वाली ज्यामितीय रंगोली 'अल्पना' को भी अब वैश्विक पहचान मिल गई है।
निहारी - नाश्ता, धीमी आंच पर मसालेदार मीट स्टू।
कड़ाही - कड़ाही और इसमें बनने वाली ग्रेवी वाली सब्जी।
शुटकी - बंगाली व्यंजनों में काम आने वाली सूखी मछली।
चपकन - अंगरखा, सामने बटन वाला लंबा और चुस्त कोट।
चापन - बिना कॉलर वाला एक लंबा, ढीला ओवरकोट।
नाजिम - स्थानीय सरकार का सर्वोच्च निर्वाचित अधिकारी।
उपजिला - प्रशासनिक कामकाज के लिए जिलों में उप-खंड।
ब्लिंगी - चमकीला, भड़कीला या गहनों से लदा-फंदा।
ऑस्ट्रेलियाई स्लैंग 'याह—नाह' (हां-ना) को भी ऑक्सफ़ोर्ड डिक्शनरी में जगह मिली है, जिसका इस्तेमाल सहमति जताने के साथ 'ना' कहने के लिए होता है। कनाडाई आइस हॉकी से निकला शब्द 'एल्बो अप' (कोहनियाँ ऊपर) भी अब आधिकारिक अंग्रेजी है, जिसे वहाँ के नेताओं द्वारा आक्रामक बचाव के संदर्भ में इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा, दिखावे की सादगी के लिए 'हम्बलब्रैग', फर्श पर बिखरे कपड़ों के लिए 'फ्लोरड्रोब' और फ्रेंच वाक्यांश 'ओ-कोंट्र' (इसके विपरीत) को भी अब 'प्रॉपर इंग्लिश' मान लिया गया है।
ऑक्सफ़ोर्ड डिक्शनरी में लगातार नए शब्द इसलिए जुड़ रहे हैं जिससे दुनियाभर के लोग चाहे वो लगातार बदलती इंटरनेट की दुनिया के किसी हिस्से से हों, एक-दूसरे की बात समझ सकें और 'बेबेल' यानी भाषाओं के उलझाव या भ्रम की स्थिति में न फंसे।