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भारत को ‘नरक’ कहने पर अमेरिका में ही बुरे फंसे ट्रंप, भारतीय मूल के सांसद ने दिया करारा जवाब

डोनाल्ड ट्रंप के भारत और भारतीय प्रवासियों पर विवादित बयान से अमेरिका में सियासी बवाल मच गया है। भारतीय मूल के सांसद अमी बेरा ने कड़ा जवाब देते हुए कहा कि प्रवासी अमेरिका को मजबूत बनाते हैं।

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Apr 24, 2026
अमेरिकी प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप। ( फोटो : ANI)

भारत को 'नरक' कहने पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने देश में ही बुरी तरह से फंस गए हैं। अमेरिका की राजनीति में ट्रंप के बयान को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय मूल के लोगों ने 'नरक' वाले बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

इस विवाद पर ट्रंप को सबसे कड़ा जवाब भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद अमी बेरा ने दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान न सिर्फ अपमानजनक हैं, बल्कि उस पद की गरिमा के खिलाफ भी हैं जिस पर ट्रंप बैठे हैं। बेरा ने साफ कहा कि यह बयान यह दिखाता है कि कुछ लोग अमेरिका की असली पहचान को समझ नहीं पा रहे हैं।

'इमिग्रेंट्स अमेरिका को मजबूत बनाते हैं'

अमी बेरा ने अपने निजी अनुभव को साझा करते हुए कहा कि उनके माता-पिता भारत से अमेरिका आए थे और उन्होंने कड़ी मेहनत से अपनी पहचान बनाई।

उन्होंने कहा- अमेरिका में आने वाले लोग देश को कमजोर नहीं, बल्कि मजबूत बनाते हैं। बेरा ने आगे कहा- यही अमेरिका की असली ताकत है कि यहां हर पृष्ठभूमि के लोग मिलकर देश को आगे बढ़ाते हैं।

‘अमेरिकन ड्रीम’ का उदाहरण

बेरा ने अपनी कहानी बताते हुए कहा कि उन्होंने अमेरिका के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की, डॉक्टर बने और अब संसद के जरिए देश की सेवा कर रहे हैं।उन्होंने इसे 'अमेरिकन ड्रीम' का उदाहरण बताया और कहा कि यह सपना लाखों प्रवासियों को प्रेरित करता है।

ट्रंप के पोस्ट से शुरू हुआ विवाद

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट शेयर किया, जिसमें भारत समेत कुछ देशों के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। इस पोस्ट के सामने आते ही विवाद खड़ा हो गया और कई नेताओं ने इसे गैर-जिम्मेदाराना बताया।

ट्रंप का 'नरक' वाला विवादित बयान ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका में इमिग्रेशन पहले से ही एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है। ट्रंप पहले भी इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते रहे हैं और उनके बयान अक्सर चर्चा में रहते हैं।

भारतीय समुदाय में चिंता

अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों के बीच भी इस बयान को लेकर चिंता देखी गई। कई संगठनों ने कहा कि इस तरह की भाषा से समाज में गलत संदेश जाता है और इससे भेदभाव बढ़ सकता है।

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