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होर्मुज स्ट्रेट में फिर होगी अमेरिकी नाकेबंदी और जहाजों से वसूला जाएगा 20% टोल टैक्स, जानिए भारत पर क्या पड़ सकता है असर

Iran-US Conflict: ईरान और अमेरिका में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट में ईरान के खिलाफ फिर से नाकेबंदी की घोषणा की है। इसके साथ ही इस जलमार्ग से गुज़रने वाले जहाजों से 20% टोल टैक्स वसूलने की भी बात कही है। ट्रंप के इस फैसले का भारत पर क्या असर पड़ेगा? आइए जानते हैं।
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Jul 13, 2026
Indian ship in strait of Hormuz
होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय जहाज (Representational Photo)

ईरान (Iran) और अमेरिका (United States of America) के बीच तनाव बढ़ता ही जा रहा है। दोनों देश एक-दूसरे के सैन्य और अन्य ठिकानों पर हमले करने से पीछे नहीं हट रहे हैं। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, "होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) खुला है और ईरान के साथ या उसके बिना भी खुला ही रहेगा। हम ईरानी के खिलाफ नाकेबंदी फिर से लागू कर रहे हैं। इसे यह नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि यह सिर्फ ईरान के जहाजों या ग्राहकों को ही आने-जाने से रोकती है। बाकी सभी देश इस जलमार्ग का निष्पक्ष और खुले तौर पर इस्तेमाल कर सकेंगे। अब से अमेरिका को 'होर्मुज स्ट्रेट का संरक्षक' माना जाएगा। साथ ही निष्पक्षता के नाते दुनिया के इस बेहद संवेदनशील हिस्से में सुरक्षा और हिफाज़त का काम करने में आने वाले सभी ज़रूरी खर्चों के लिए अमेरिका को वहाँ से गुज़रने वाले सभी कार्गो जहाजों पर 20% की दर से टोल टैक्स का भुगतान किया जाएगा। यह प्रक्रिया और व्यवस्था तुरंत शुरू हो जाएगी।"

तनाव बढ़ना तय

ट्रंप के इस फैसले से ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता तय है। अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का फैसला लिया है लेकिन ट्रंप ने साफ कर दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का कंट्रोल नहीं रहेगा और यह जलमार्ग सभी के लिए खुला रहेगा। ऐसे में ईरान के फैसले को नज़रअंदाज़ करने से इसका खामियाजा इस जलमार्ग से गुज़रने वाले जहाजों को भुगतना पड़ सकता है क्योंकि ईरान उनको निशाना बना सकता है। वहीँ अमेरिका इन हमलों को रोकने की पूरी कोशिश करेगा, जिससे दोनों देशों के बीच हमलों का सिलसिला जारी रह सकता है।

भारत पर क्या पड़ सकता है असर?

ट्रंप के इस फैसले का भारत (India) पर भी असर पड़ सकता है। भारत तेल के सबसे बड़े आयातकों में से एक है और होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते भारत के कुल आयातित तेल का बड़ा हिस्सा आता है। पिछली बार युद्ध की वजह से भारत आने वाले कई जहाज फंस गए थे, जिससे देश में तेल-गैस का संकट पैदा हो गया था और साथ ही कीमतों में भी इजाफा देखने को मिला था। अब एक बार फिर देश में तेल और गैस की सप्लाई बाधित हो सकती है। तेल-गैस की कीमतें फिर से बढ़ने का जोखिम भी मंडरा रहा है, जिससे लोगों की जेब पर असर पड़ेगा। टोल टैक्स की स्थिति में तेल और गैस कंपनियों का खर्चा बढ़ेगा। इतना ही नहीं, अगर तेल और गैस की कीमतों से इजाफा हुआ तो भारतीय रूपए के कमजोर होने और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ने की भी आशंका है।