US Iran War: अमेरिकी क्रूड ऑयल की कीमतों में 8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और यह 104.24 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया...
Oil Price Rise: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सेना द्वारा नाकेबंदी का ऐलान कर दिया है। ट्रंप के ऐलान के बाद वैश्विक तेल बाजार में उछाल देखा गया है। समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक, इस कदम से कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई है।
दरअसल, अमेरिकी क्रूड ऑयल की कीमतों में 8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और यह 104.24 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि ब्रेंट क्रूड 7 फीसदी चढ़कर 102.29 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
बता दें कि अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के दौरान तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है। फरवरी के अंत में करीब 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर कीमतें अपने चरम पर 119 डॉलर से ऊपर पहुंच गई थीं।
ईरान ने रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य पर प्रभावी नियंत्रण बना रखा है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, नाकेबंदी को सभी देशों के जहाजों पर निष्पक्ष रूप से लागू किया जाएगा, जो ईरानी बंदरगाहों या तटीय इलाकों में प्रवेश या निकास करेंगे।
हालांकि, गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच यात्रा करने वाले जहाजों को जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी जाएगी।
दरअसल, दुनिया के कुल व्यापारिक तेल का लगभग 20 फीसदी हर दिन इसी मार्ग से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, यूएई, कुवैत और ईरान जैसे बड़े तेल निर्यातक इसी रास्ते पर निर्भर हैं।
ऐसे में नाकेबंदी से वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव बढ़ने का खतरा है। भले ही प्रतिबंध आंशिक हों, लेकिन इससे शिपमेंट धीमा हो सकता है और डिलीवरी में देरी हो सकती है।
क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही कम होने और टैंकरों के लिए बढ़ते जोखिम से तेल की कीमतों और परिवहन लागत में और इजाफा हो सकता है। इसका सीधा असर उन देशों पर पड़ेगा जो मध्य-पूर्व से तेल आयात पर निर्भर हैं।
दरअसल, भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है। तेल की कीमतों में उछाल का भारत में भी प्रभाव देखने को मिलेगा। इसके अलावा एलपीजी में भी संकट आ सकता है। इससे पहले भी युद्ध के दौरान देश में गैस को लेकर काफी मारमारी देखी गई थी। एलपीजी की कीमतों में वृद्धि हो गई। यदि अब भी संकट रहता है तो एक बार फिर कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।