विदेश

जिम और दौड़ने से ज़्यादा फायदा करती है एक्सेंट्रिक एक्सरसाइज़, पसीना बहाने की भी ज़रूरत नहीं

क्या आपको पता है कि जिम और दौड़ने से ज़्यादा फायदा कुछ और व्यायामों से होता है? आइए जानते हैं इन असरदार व्यायामों के बारे में।

2 min read
May 08, 2026
Eccentric exercise

अगर आप मानते हैं कि मज़बूत मांसपेशियाँ बनाने के लिए खुद को जिम में थकाना या पसीने से तर-बतर होना ज़रूरी है, तो हाल ही में नई रिसर्च आपकी सोच बदल देगी। ऑस्ट्रेलिया की एडिथ कोवेन यूनिवर्सिटी (ईसीयू) की नई रिसर्च के अनुसार बिना दर्द और बिना थकावट के भी मांसपेशियों की ताकत और आकार को बढ़ाया जा सकता है। ईसीयू के स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज़ में एक्सरसाइज़ एंड स्पोर्ट्स साइंस की प्रोफेसर प्रोफेसर केन नोसाका का कहना है कि व्यायाम का मतलब दर्द होना जरूरी नहीं है। उनके अनुसार, 'एक्सेंट्रिक एक्सरसाइज़' पारंपरिक वर्कआउट के मुकाबले कम मेहनत में बेहतर नतीजे दे रही है।

ये भी पढ़ें

परिवार में दिल की बीमारी का इतिहास, तो बच्चों की भी करानी चाहिए जांच

क्या है एक्सेंट्रिक एक्सरसाइज़?

एक्सेंट्रिक एक्सरसाइज़ का मतलब उन शारीरिक गतिविधियों से है जहाँ मांसपेशियाँ खिंचाव या विस्तार के दौरान सक्रिय होती हैं। जैसे डंबल को नीचे लाना, सीढ़ियां उतरना या कुर्सी पर धीरे-धीरे बैठना। रिसर्च के अनुसार वजन उठाने या चढ़ने के मुकाबले वजन को धीरे-धीरे नीचे ले जाने में मांसपेशियाँ ज़्यादा बल पैदा करती हैं और ऊर्जा भी कम खर्च होती है। यानी कम थकान और ज़्यादा फायदा।

दर्द कम तो रहती है नियमितता

प्रोफेसर नोसाका के अनुसार एक्सेंट्रिक एक्सरसाइज़ के लिए आपको महंगे जिम की ज़रूरत नहीं है। चेयर स्क्वाट्स, हील ड्रॉप्स और वॉल पुश-अप्स जैसी गतिविधियाँ रोजाना सिर्फ 5 मिनट करके भी बड़े सुधार देखे जा सकते हैं। यह तकनीक बुज़ुर्गों और दिल की बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए वरदान है क्योंकि इसमें दिल और फेफड़ों पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता। नोसाका के अनुसार जब एक्सरसाइज़ आसान और हासिल करने योग्य लगती है, तो लोग इसे लंबे समय तक जारी रख पाते हैं।

बिना पसीने वाली ताकत

एक्सेंट्रिक एक्सरसाइज़ में मांसपेशियाँ तब काम करती हैं जब वो लंबी (लेंथनिंग) हो रही होती हैं। यह शरीर के जोड़ों और हड्डियों पर कम दबाव डालती है, जिससे मांसपेशियों की चोट का खतरा न्यूनतम हो जाता है। उदाहरण के लिए एक साधारण पार्क बेंच पर 'लेग स्ट्रेच' या 'सिट-अप्स' जैसी एक्सरसाइज़ भी जिम की भारी मशीनों से ज़्यादा प्रभावी हो सकती है।

ये भी पढ़ें

स्वास्थ्य पर एआई से सलाह लेना खतरनाक, रिसर्च के अनुसार 50% जानकारी होती है गलत
Also Read
View All