
EU-India FTA: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच एक ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एंग्रीमेंट (FTA) को लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। यूरोपीय आयोग ने EU काउंसिल को इस समझौते पर हस्ताक्षर करने और इसे अंतिम रूप देने के लिए एक औपचारिक प्रस्ताव सौंपा है। काउंसिल से मंजूरी मिलने के बाद, यह दोनों पक्षों के इतिहास में सबसे बड़ा व्यापार समझौता बन जाएगा।
यूरोपीय आयोग के अनुसार, इस समझौते के लागू होने से EU और भारत के बीच व्यापार लागत में काफी कमी आएगी। भारत को होने वाले कुल यूरोपीय निर्यात के 96% हिस्से पर सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) या तो पूरी तरह से खत्म कर दिया जाएगा या काफी कम कर दिया जाएगा।
इससे यूरोपीय कंपनियों को सीमा शुल्क के रूप में सालाना लगभग 4 बिलियन यूरो यानि लगभग 36,000 करोड़ रुपये की बचत करने में मदद मिलेगी। आयोग का अनुमान है कि 2032 तक EU से भारत को होने वाला निर्यात दोगुना हो जाएगा। दोनों पक्ष वर्तमान में सालाना 180 बिलियन यूरो से अधिक मूल्य के सामान और सेवाओं का व्यापार करते हैं, जिससे यूरोप में लगभग 800,000 नौकरियां जुड़ी हैं।
इस FTA के लागू होने के बाद, भारत आने वाली यूरोपीय कारों पर टैरिफ को धीरे-धीरे 110% से घटाकर 10% कर दिया जाएगा। वहीं, ऑटो पार्ट्स पर लगने वाले टैक्स को 5 से 10 साल की अवधि में खत्म कर दिया जाएगा। यूरोपीय वाइन पर मौजूदा 150% आयात शुल्क को समझौता लागू होते ही घटाकर 75% और बाद में 20% कर दिया जाएगा। ऑलिव ऑयल पर 45% शुल्क को अगले पांच वर्षों में चरणबद्ध तरीके से खत्म कर दिया जाएगा, जबकि ब्रेड और कन्फेक्शनरी पर 50% तक के शुल्क को पूरी तरह हटा दिया जाएगा।
FTA के तहत, दोनों पक्षों ने अपने संवेदनशील कृषि क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए इंतजाम किए हैं। EU के अनुसार, बीफ़, चिकन, चावल, चीनी और कुछ अन्य संवेदनशील कृषि उत्पादों के लिए मौजूदा सुरक्षा उपाय लागू रहेंगे। EU बाजार में प्रवेश पाने के लिए भारतीय उत्पादों को EU के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा। इसका मतलब है कि टैरिफ में भारी कटौती के बावजूद, सभी कृषि उत्पादों के लिए बाजार पूरी तरह से नहीं खोले जाएंगे।
यह प्रस्तावित समझौता सिर्फ सामानों के व्यापार तक ही सीमित नहीं है। इसमें भारत के सर्विस सेक्टर में EU कंपनियों के लिए मार्केट तक पहुंच बढ़ाने के प्रावधान भी शामिल हैं, खासकर फाइनेंशियल सर्विस और समुद्री ट्रांसपोर्ट जैसे क्षेत्रों में। यूरोपीय आयोग इसे फाइनेंशियल सर्विस मार्केट तक पहुंच के उन सबसे बड़े प्रस्तावों में से एक मानता है जो भारत ने कभी किसी ट्रेडिंग पार्टनर को दिए हैं।
FTA में सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर एक चैप्टर शामिल है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, मज़दूरों के अधिकार और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर सहयोग के प्रावधान हैं।
भारत और EU के बीच FTA पर बातचीत 2007 में शुरू हुई थी। 2013 में बातचीत रुक गई थी, लेकिन 2022 में इसे फिर से शुरू किया गया। बातचीत का 14वां और आखिरी औपचारिक दौर अक्टूबर 2025 में हुआ। इसके बाद 27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों पक्षों ने FTA बातचीत पूरी होने की घोषणा की। समझौते को लागू करने की औपचारिक प्रक्रियाएं अब चल रही हैं।
यूरोपीय आयोग के मौजूदा प्रस्ताव का मतलब यह नहीं है कि FTA तुरंत लागू हो गया है। सबसे पहले, EU काउंसिल को समझौते पर हस्ताक्षर करने और उसे पूरा करने की मंज़ूरी देनी होगी। इसके बाद, समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे और यूरोपीय संसद की सहमति की जरूरत होगी। भारत को भी अपनी आंतरिक मंज़ूरी की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।